जी.एफ.टी. समझने का यत्न!



शिवकुमार मिश्र ने ग्रेटर फूल्स थियरी की बात की। मुझे इसके बारे में मालुम नहीं था। लिहाजा, एक फूल की तरह, अपनी अज्ञानता बिन छिपाये, शिव से ही पूछा लिया।

ग्रेटर फूल थियरी, माने अपने से बेहतर मूर्ख जो आपके संदिग्ध निवेश को खरीद लेगा, के मिलने पर विश्वास होना।

fool fool fool

मेरी समझ में अगर एक मूर्ख है जो अपने से ग्रेटर मूर्ख को अपना संदिग्ध निवेश बेच देता है, तो फिर बेचने पर अपना मूर्खत्व समेट अपने घर कैसे जा सकता है? जबकि वह परिभाषानुसार मूर्ख है। वह तो फिर निवेश करेगा ही!

एक मूर्ख अपना मूर्खत्व कब भूल कर निर्वाण पा सकता है?

एक मूर्ख और उसके पैसे में तलाक तय है। और यह देर नहीं, सबेर ही होना है!


खैर; हमें जी.एफ.टी. की याद तब आनी चाहिये जब स्टॉक मार्केट उछाल पर हो।


कटहल का पौधा



Katahal 3मेरे घर में कटहल का पौधा

घर में है छोटा सा स्थान जहां हम वनस्पति लगा सकते हैं। उसी जगह में बीचों बीच इस बरसात के शुरू में हमने एक कटहल का बिरवा रोपा था। ईश्वर की कृपा से वह जड़ पकड़ गया। तीन महीने में अच्छी लम्बाई खींची है उसने। अब मैं देखता हूं कि वह मेरी ऊंचाई की बराबरी कर रहा है। कुछ ही समय में वह मुझसे अधिक ऊंचा हो जायेगा।

इस साल वर्षा बहुत अच्छी हुई है। मुझे बताया गया है कि अच्छी वर्षा के कारण सर्दी भी अच्छी पड़ेगी। अभी दो महीने हैं पाला आने को। इस साल कोहरा जल्दी पड़ने लगेगा और लम्बा चलेगा। कटहल के पौधे का स्वास्थ्य देख कर मैं आश्वस्त हो रहा हूं। दो महीनों में वह इतना पनप जायेगा कि कड़ाके की सर्दी को झेलने में सक्षम होगा।Rita with Kathal 2

इतनी चिन्ता है उस पौधे की। हर रोज उसके एक-दो चक्कर लगा आता हूं। उसे सम्बोधन करने का, बात करने का भी मन होता है। पर उसका कोई नाम नहीं रखा है। कोई नाम तो होना चाहिये।

इस पौधे को लगाने के बाद ऐसा नहीं है कि हमने वृक्षारोपण में कोई क्रान्ति कर दी है। बतौर रेल अधिकारी बहुत से पौधे वृक्षारोपण समारोहों में लगा कर फोटो खिंचवाये और तालियां बजवाई हुई हैं। उन पौधों की कभी याद भी नहीं आती। यह भी नहीं पता कि उनमें से कितने जी पाये।

इस पौधे के लगाने में वैसा कुछ नहीं हुआ। माली ने ला कर लगा दिया था। शाम के समय मुझे सूचना भर मिली थी कि मेरी इच्छानुसार पौधा लगा दिया गया है। उसके बाद तो उस पौधे के पनपने के  साथ-साथ ममता पनपी। आज वह प्रगाढ़ हो गयी है।

वैराज्ञ लेना हो तो जो जो बाधायें होंगी, उनमें एक बाधा होगा यह कटहल का पौधा भी। भगवान करें वह दीर्घायु हो!  


"वैराज्ञ? हुंह!"। मेरी पत्नीजी पोस्ट देख कर त्वरित टिप्पणी करती हैं – "जो मन आये सो लिख दो अपनी पोस्ट में।"

मैं डिप्रेसिया जाता हूं। पूरे चबीस घण्टे यह कटहल पोस्ट नहीं करता। उनसे पूछता भी हूं – क्या इसे डिलीट कर दूं? पर स्पष्ट उत्तर नहीं देतीं वे।

लिहाजा पोस्ट पब्लिश कर दे रहा हूं। पर सवाल है – क्या रिनंसियेशन वैराज्ञ में वाइफ पार्टीसिपेट पत्नी सहभागिता नहीं कर सकती? मेरे वैराज्ञ में मैं का क्या अर्थ है? जब पत्नी पूरी अंतरंगता का हिस्सा हैं तो मैं और वह का क्या अंतर? उत्तर शायद राजा जनक के पास हो।


मैकदोनाल्द में देसी बच्चे



चार थे वे। आइसक्रीम ले कर काउण्टर से ज्यादा दूर चल कर सीट तलाशने का आत्मविश्वास नहीं था उनमें। सबसे नजदीक की खाली दो की सीट पर चारों बैठे सहमी दृष्टि से आस-पास देखते आइस्क्रीम खा रहे थे।

मैं आशा करता हूं कि अगली बार भी वे वहां जायेंगे, बेहतर आत्मविश्वास के साथ। मैकदोनाल्द का वातावरण उन्हें इन्टीमिडेट (आतंकित) नहीं करेगा। 


माइक्रोपोस्ट? बिल्कुल! इससे ज्यादा माइक्रो मेरे बस की नहीं!
ज्यादा पढ़ने की श्रद्धा हो तो यह वाली पुरानी पोस्ट – "बॉस, जरा ऑथर और पब्लिशर का नाम बताना?" देखें!
@@@
सुना है सिंगूर से साणद सादर ढो ले गये टाटा मोटर्स को गुजराती भाई।Ha Ha


Design a site like this with WordPress.com
Get started