उत्तर प्रदेश में बिजली हड़ताल जो नहीं हुई



जान सांसत में थी उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति की हड़ताल की धमकी पर। घर और दफ्तर – दोनो फ्रण्ट पर।

अपनी अम्मा को जब मैने कहा था कि हड़ताल होगी और शायद पानी न आये नल में। बिजली नहीं आये तो बोरवेल से पानी भी न निकाला जा सके। यह जान कर उन्होने कण्टिंजेंसी प्लान बना लिया था बालटी-भगोने तक पानी से भर रखने का। पहले यह 24 अक्तूबर से होने जा रही थी। फिर 26 अक्तूबर हुआ।

सरकार ने एस्मा (Essential Services Maintenance Act) लगाने की धमकी दे दी थी – ऐसा खबरों में था।  

रेलवे के स्तर पर भी आपात योजना बन गयी। अगर ट्रैक्शन की बिजली गयी तो गाड़ियाँ चलेंगी या नहीं और चलेंगी तो कैसे – यह धुकधुकी बढ़ रही थी। हमारे पास तो रेल के पूर्व-पश्चिम तथा उत्तर-दक्षिण दोनो मेन रूट हैं रेल यातायात के। UPPCLऔर दोनो उत्तरप्रदेश से गुजरते हैं। नियंत्रण कक्ष में आपात ड्यूटी तय कर ली गयी थी। पर मामला सरक गया आगे। परसों शाम को पता चला कि हड़ताल फिलहाल तो नहीं है। चैन हुआ कि सप्ताहांत पर झमेला या ट्रेने रुकने का झाम तो नहीं होगा।

कल दोपहर इण्डियन एक्स्प्रेस की साइट पर खबर आयी कि कर्मचारियों ने हड़ताल वापस लेली है। आप चित्र देखें। मजे की बात यह है कि सरकार ने कोई भी कंशेसन नहीं दिया है। कम से कम प्रेस खबर से तो यही साफ होता है।»»

उल्टे प्रेस खबर में यह है कि अनपारा-सी यूनिट के लिये काम प्राइवेट कम्पनी लांको द्वारा कल प्रारम्भ किया जायेगा। यह प्रिंसीपल सचिव (गृह) ने कही है और प्रिंसीपल सचिव (ऊर्जा) तथा यूपीपीसीएल के चेयरमैन भी वहां थे।

ये लांको कौन कम्पनी है – मुझे ठीक से नहीं मालुम। आज ही नेट पर देखा! पर मुझे प्रसन्नता है कि 1000मेगावाट बिजली का अनपारा-सी सन्यंत्र बनने लगेगा। प्राइवेट सेक्टर बनायेगा तो नियत समय – सन 2011 में ऑपरेशनल होने की भी सम्भावना है। Lanco

««लांको इंफ्राटेक के नाम की इस कम्पनी के सम्भावित प्रॉजेक्ट्स में अनपारा-सी का नाम है। इस कम्पनी के शेयर पिछली जुलाई से ढ़ाई गुना बढ़े हैं। (चित्र बायीं तरफ देखें)। हमें ऐसी कम्पनी का पता कभी समय पर नहीं चलता! smile_regular   

पर उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति कैसे पीछे हटी? यह जानने का विषय है। मुझे दो बातें लगती हैं –

  1. उत्तरप्रदेश सरकार कड़ा रुख अपनाने में सक्षम है। और
  2. बिजली कर्मियों के साथ जन समर्थन का अभाव है।

पर यही कड़ाई सरकार बिजली चोरी रोकने के अभियान में इन्ही कर्मचारियों को लगाने में करे तो मजा है। तब शायद कर्मचारियों को असली कष्ट हो। लांको के प्रति विरोध तो (शायद) केवल प्रतीकात्मक है। और तभी हड़ताल की धमकी छितरा गयी।


मेरे एक मित्र ने कल शाम बताया कि पावर ग्रिड कार्पोरेशन के लोग उस समय भी तैनात थे किसी भी हड़ताल की आशंका के खिलाफ! कॉर्पोरेशन का लिखित आदेश उन तक नही‍ पंहुचा था।

मित्रों, कभी कभी मुझे भ्रम होता है कि मेरे पास नौकरी नहीं होती तो मैं पत्रकार बन सकता था! यह जो लिख रहा हूं उसका आधा तो खबर में ठेलने लायक है।


व्योमकेश शास्त्री उर्फ हजारी प्रसाद द्विवेदी – लेख का स्कैन



Gyan(119)मैने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के उक्त शीर्षक वाले लेख पर आर्धारित पोस्ट प्रस्तुत की थी – ‘व्योमकेश शास्त्री और बेनाम ब्लॉगरी’
उस पर कुछ मित्रों (रवि रतलामी मुख्य रूप से) ने लेख के स्कैन की मांग की थी। लेख के 4 पृष्ठों का स्कैन नीचे उपलब्ध है। आप बायीं ओर के पुस्तक के फ्रण्ट कवर चित्र पर क्लिक कर ‘व्योमकेश.पीडीएफ’ फाइल डाउनलोड करें। इस फाइल में चार स्कैन किये पेज हैं जिनमें पूरा लेख है।

स्कैन पेजों की बजाय पीडीएफ फाइल मैं इसलिये प्रस्तुत कर रहा हूं, जिससे डाउनलोड में दशमांश से भी कम डाटा आपके कम्प्यूटर को उतारना पड़े।

(वैसे, अगर आपने लेख नहीं पढ़ा है तो मैं पढ़ने की सिफारिश करूंगा। यह किसी ब्लॉग पोस्ट से कहीं ज्यादा पठनीय है।)


क्या आप अन्दाज लगा सकते हैं – ‘कल की फीड एग्रेगेटर – पेप्सी या कोक’ वाली एण्टी-आस्था चैनल टाइप पोस्ट पर सामान्य से 60% ज्यादा क्लिक आये। टिप्पणियां करने में जरूर लोग मुक्त नहीं रहे। पर यह स्पष्ट हो गया कि एण्टी-आस्था चैनल भी चलता है!


फीड एग्रेगेटर – पेप्सी या कोक?



प्रसिद्ध मजाक चलता है – कोकाकोला के कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया। उसके रक्त सैम्पल में पेप्सी की ट्रेसर क्वांटिटी पायी गयी। गजब की प्रतिद्वन्दिता है दोनो में। गला काट। वही शायद देर सबेर हिन्दी ब्लॉगों के बढ़ते फीड एग्रेगेटरों में होगी।

मैने तीन महीने पहले एक पॉवरप्वॉइण्ट प्रेजेण्टेशन फाइल ठेली थी अपनी पोस्ट ‘कछुआ और खरगोश की कथा – नये प्रसंग’ के माध्यम से। उस पीपीस फाइल में यह था कि सन 1980 में रोबर्टो गोइजुयेटा ने कोका कोला की कमान सम्भाली थी तब पेप्सी की ओर से जबरदस्त प्रतिद्वन्दिता थी। cokeरोबर्टो ने कोक को पेप्सी की प्रतिद्वन्दिता की मानसिकता से निकाल कर किसी भी पेय – पानी सहित की प्रतिद्वन्दिता में डाला और नतीजे आश्चर्यजनक थे। आप यह पावरप्वॉइण्ट फाइल कोकाकोला के चित्र पर क्लिक कर डाउनलोड कर सकते हैं।»»

कुछ वैसी ही बात हिन्दी ब्लॉगरी के फीड एग्रीगेटरों में दिख रही है। एक के शीर्ष लोगों की फीड दूसरा नहीं दिखा रहा। चक्कर यह है कि फीड एग्रेगेटर को सर्व-धर्म-समभाव छाप समझने की सोच से लिया जा रहा है। उसे बिजनेस प्रतिस्पर्धा – गूगल बनाम याहू या रिलायंस बनाम टाटा जैसा नहीं लिया जा रहा। पता नहीं अंतत: कैसा चले। सब राम धुन गायें या अपनी अपनी तुरही अलग-अलग बजायें। पर ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिये।

मेरे ख्याल से प्रतिस्पर्धा – और गलाकाट प्रतिस्पर्धा हो कर रहेगी। लोग अपनी स्ट्रेटेजी बन्द कमरे में बनायें। वह ज्यादा इफेक्टिव रहेगी। और प्रतिद्वन्दी कौन है – वह अवश्य तय करें।

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आप विचारें: फील्ड ब्लॉगवाणी बनाम नारद बनाम चिठ्ठाजगत की सेवा लेते वही 1000 ब्लॉगर नहीं है। फील्ड हिन्दी जानने वाले (केवल हिन्दी के विद्वान नहीं) वे सभी लोग हैं जो अपने को अभिव्यक्त करने की तलब रखते हैं। फील्ड में शायद वे भी हैं जो हिन्दी समझ लेते हैं पर देवनागरी पढ़ नहीं सकते। यह संख्या बहुउउउउउउत बड़ी है। रोबर्टो गोइजुयेटा की तरह पैराडाइम (paradigm – नजरिया) बदलने की जरूरत है।


बी.बी.सी. हिन्दी पर मैथिली गुप्त का एग्रेगेटर के खर्च पर कथन:
इतने खर्चे के पीछे कोई व्यवसायिक उद्देश्य? यह पूछे जाने पर सरकारी नौकरी में भाषायी सॉफ्टवेयर निर्माण के काम से रिटायर मैथिली गुप्त कहते हैं, “ज़िंदगी भर बहुत कमाया है, ब्लॉगवाणी तो अब बुढ़ापे में खुद को व्यस्त रखने का एक साधन भर है. पर भविष्य में एग्रीगेटरों के व्यावसायिक महत्व से इनकार भी नहीं किया जा सकता.”


और एग्रेगेटरी के खेल में भी बिलो-द-बेल्ट (below the belt) हिट करने की या हिट खाने की गुंजाइश ले कर चलनी चाहिये। उसे मैं बिजनेस एथिक्स के बहुत खिलाफ नहीं मानता। और जो समझते हैं कि एग्रेगेटरी समाज सेवा है – सीरियस बिजनेस नहीं, उन्हें शायद माइण्ड सेट बदल लेना चाहिये। जब प्रोब्लॉगर का ब्लॉग मात्र ब्लॉग होते हुये $54,000 के ईनाम बांट सकता है तो ब्लॉग एग्रेगेटरी को भविष्य के लिये सीरियस बिजनेस1 मानना ही चाहिये। न मानें तो आप अपने रिस्क पर न मानें! आज की तारीख में एक समाज सेवी एनजीओ चलाना भी सीरियस बिजनेस है। जब यह माइण्ड सेट बदलेगा तो सेवा में वैल्यू-एडीशन चमत्कारिक तरीके से होगा।

चलिये साहब – आज की पोस्ट प्रति-आस्था (Anti-Astha Channel) चैनल छाप ही सही! एक दिन हिट कम भी मिलें तो चलेगा! बस, यही मनाता हूं कि जिन्हे पढ़ना चाहिये, वे पढ़ लें!


1. कोई साइट अगर कुछ हजार से ज्यादा विजिट रोज पा रही है तो मेरे अन्दाज से मात्र विजिट की संख्या के कारण वह बिजनेस में है!


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