अमेरा रोपनी कर्मी छोड़ने आये पांच किलोमीटर


यादव जी मेरे साथ घाटी को पार किए हैं 3 किलोमीटर तक। भगवान इनके बाल बच्चों को सुखी रखे निरोग रखें। यही महादेव जी से निवेदन कर रहा हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद इनको। हर हर महादेव! – प्रेमसागर

जंगल ही पड़ा – अमरकण्टक से करंजिया


पर यह लग गया कि महिला के पास कोई कपड़ा था ही नहीं। प्रेमसागर ने उसे अपना छाता दे दिया। और मन द्रवित हुआ तो अपनी एक धोती भी निकाल कर उसे दे दी। महिला लेने में संकोच कर रही थी। तब प्रेम सागर ने कहा – “ले लो। तुम्हें यहां जंगल में कोई देने वाला नहीं आयेगा। मेरी फिक्र न करो, महादेव की कृपा रही हो बाद में मुझे कई छाता देने वाले मिल जायेंगे। माई, मना मत करो।”

कल बारिश का दिन रहा अमरकण्टक में


कल प्रेमसागर जी के दो कांवर मित्र – भुचैनी पांड़े और अमरेंद्र पांड़े 10-11 बजे तक अमरकण्टक पंहुचेंगे। वे अपनी कांवर साथ ले कर आ रहे हैं। प्रेमसागर की कांवर कारपेण्टर जी से बनवा रहे हैं रेस्ट हाउस के वर्मा जी। परसों ये लोग नर्मदा उद्गम स्थल से जल उठा कर रवाना होंगे ॐकारेश्वर के लिये। प्रेम-भुचैनी-अमरेंद्र की तिगड़ी नये नये अनुभव करायेगी ब्लॉग पर।

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