जबलपुर, धुंआधार, नर्मदा, गाक्कड़ भर्ता


प्रेम सागर जो महीने भर पहले मात्र यात्रा की दूरी गिन रहे थे, अब लोगों से मिलने में और उनके साथ चित्र खिंचवाने में भी रस ले रहे हैं। … उत्तरोत्तर निखार आ रहा है प्रेमसागर के व्यक्तित्व में। कांवर यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ेगी, प्रेमसागर का व्यक्तित्व उत्तरोत्तर संतृप्त होता जायेगा। संतृप्त और परिपक्व। यात्रा व्यक्ति में बहुत कुछ धनात्मक परिवर्तन लाती है।

जबलपुर, ग्वारीघाट, गुप्तेश्वर महादेव और अर्जी वाले हनुमानजी


प्रेमसागर अपने जीवन की सार्थकता तलाश रहे हैं। उसी की तलाश में चलते चले जा रहे हैं। पर यह सार्थकता तलाशते तलाशते किसी मुकाम पर सफलता और शोहरत न तलाशने लग जायें – इसका मुझे भय है।

कुण्डम से जबलपुर – वृहन्नलाओं का आशीष पाये प्रेमसागर


वृहन्नलाओं में सबसे उम्रदराज प्रेमसागर के सिर पर हाथ रख आशीष दे रहा था। भारत में कोई बड़ा काम हो, बच्चा जन्मे या किसी का विवाह हो और हिंजड़े गुणगान कर आशीष दें; वह शुभ माना जाता है।

देवरी से कुण्डम का रास्ता


प्रेम सागर पहले अपने संकल्प में, ज्योतिर्लिंगों तक येन केन प्रकरेण पंहुचने में अपनी कांवर यात्रा की सार्थकता मान रहे थे। अब वे यात्रा में हर जगह, हर नदी, पहाड़, झरने, पशु पक्षियों और लोगों में शिव के दर्शन करने लगे हैं।

देवरी में साहू जी के घर पर


साहू जी के भांजे अनिल ने बताया – “यह तो नसीब है कि सेवा का मौका मिलता है। प्रेम सागर जी तो धरम पर टिके हैं। हम लोगों को अच्छी अच्छी बातें बता रहे हैं। ज्ञान की बातें बता रहे हैं। उनका यहां रुकना सौभाग्य है हमारा।”

अमेरा रोपनी कर्मी छोड़ने आये पांच किलोमीटर


यादव जी मेरे साथ घाटी को पार किए हैं 3 किलोमीटर तक। भगवान इनके बाल बच्चों को सुखी रखे निरोग रखें। यही महादेव जी से निवेदन कर रहा हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद इनको। हर हर महादेव! – प्रेमसागर