चित भी मेरी और पट भी


बचपन में मां चिडिया की कहानी बताती थीं. चिड़िया अपनी कुलही (टोपी) पर इतराती फिर रही थी. कह रही थी कि उसकी कुलही राजमुकुट से भी अधिक सुन्दर है. उसके गायन से तंग आ कर कुलही राजा ने छीन ली थी. चिड़िया गाती फिरी – “रजवा सैतान मोर कुलही लिहेस.(राजा शैतान है. उसने मेरी टोपीContinue reading “चित भी मेरी और पट भी”

भगवान जाधव कोळी जी की याद


जळगांव में प्राइवेट नर्सिंग होम के बाहर, सन 2000 के प्रारम्भ में, मेरे साथी भीड़ लगाये रहते थे. मेरा लड़का सिर की चोटों और बदन पर कई स्थान पर जलने के कारण कोमा में इंटेंसिव केयर में भरती था. मैं व मेरी पत्नी हर क्षण आशंका ग्रस्त रहते थे कि अब कोई कर्मी या डाक्टरContinue reading “भगवान जाधव कोळी जी की याद”

मैं सारथी हूं


तुम्हें याद न होगा पार्थकि तुम पार्थ होमैं जन्म-जन्मांतरों मेंतुम्हारे रथ की डोरअपने हाथ में रखदिलाता रहा हूं तुम्हें विजयतुम्हारे विषाद-योग ग्रस्त होने परललकारता रहा हूंकहता रहा हूं तुम्हें दुर्बल-नपुंसकबनाता रहा हूं तुम्हें निमित्तदेता रहा हूं आश्वासनतुम्हें समीप होने कातुम्हें प्रिय होने कातुम्हें अंतत: विजयी होने काअनेक प्रकार सेअनेक रूपों मेंअनेक युगों मेंतुम्हारी उंगली पकड़ेContinue reading “मैं सारथी हूं”

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