पवनसुत स्टेशनरी मार्ट


पवनसुत स्टेशनरी मार्ट एक गुमटी है जो मेरे घर से 100 कदम की दूरी पर है. इसमें पानमसाला, सिगरेट, गुटका, च्यूइंगम का भदेस संस्करण, चाय, “रोजगार” के पुराने अंक (और थोड़ी कॉपियां-कलम) बिकते हैं. गुमटी के साइड में कुछ बैंचें लगी हैं, जिनपर कुछ परमानेण्ट टाइप के बन्दे – जिन्हे भद्र भाषा में निठल्ले कहाContinue reading “पवनसुत स्टेशनरी मार्ट”

लिखना कितना असहज है!


ब्लॉग लेखन कितना असहज है. लेखन, सम्पादन और तत्पश्चात टिप्पणी (या उसका अभाव) झेलन सरल जीवन के खिलाफ़ कृत्य हैं. आपका पता नहीं, मैं तनाव महसूस करता हूं. विशेषकर चिकाई लेखन (इस शब्द को मैने शब्दकोष और समान्तर कोश में तलाशने का प्रयास किया, असफ़लता हाथ लगी. अत: अनुमान के आधार पर इसका प्रयोग करContinue reading “लिखना कितना असहज है!”

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