शवयात्रा


अभी सवेरे दफ्तर आते समय मेरा वाहन झटके से रुका. चौराहा था. ड्राइवर ने आड़ी सड़क पर एक कारवां के चलते वाहन रोका था. उस कारवां में सबसे आगे एक मल्टी-यूटिलिटी-वेहीकल का पीछे वाला ऊपर की ओर उठ कर खुलने वाला दरवाजा खुला था. वेहीकल में लम्बाई में एक फूलों से लदा शव रखा था.Continue reading “शवयात्रा”

अपने आप पर व्यंग का माद्दा और दुख पर फुटकर विचार


परसों मैने लिखी ज्ञानदत्त मोनोपोली ध्वस्त होने की आशंका से परेशान वाली पोस्ट. किसी भी कोण से उत्कृष्टता के प्रतिमान पर खरी तो क्या, चढ़ाई भी न जा सकने वाली पोस्ट. ऐसा खुरदरा लेखन केवल ब्लॉग पर ही चल सकता है. उसमें केवल एक ध्येय था – सिर्फ यह देखना कि अपने पर निशाना याContinue reading “अपने आप पर व्यंग का माद्दा और दुख पर फुटकर विचार”

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