गाजर घास पर जानकारी


आज बुधवासरीय अतिथि पोस्ट में आप श्री पंकज अवधिया द्वारा गाजर घास पर विभिन्न कोणों से दी गयी विस्तृत जानकारी उनके नीचे दिये गये लेख में पढ़ें। उनके पुराने लेख आप पंकज अवधिया के लेबल सर्च से देख सकते हैं। गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस) की समस्या जन-जन की समस्या बनती जा रही है। भारत मेंContinue reading “गाजर घास पर जानकारी”

भय, विश्वास और कर्मयोग


हर एक के जीवन में अवसर आते हैं जब नयी अपेक्षायें होती हैं व्यक्ति से। नेतृत्व की विविधता की आवश्यकता बनती है। पर लोग उसे फेस करने या उस पर खरा उतरने से बचते हैं। बहुत कुछ अर्जुन विषाद की दशा होती है। जब कर्म की अपेक्षा होती है तो मन उच्चाटन की दिशा मेंContinue reading “भय, विश्वास और कर्मयोग”

शिवकुमार मिश्र का ब्लॉग


भाई गुड़ रहा, छोटा भाई शक्कर हो गया। वह भी जमाना था कि शिवकुमार मिश्र को ब्लॉगरी की दुनियां में ठेलियाने के लिये मैने बहुत जतन किया। पहले पहल वे मेरे ब्लॉग पर रोमनागरी में टिप्पणी किया करते थे। फिर मैने उन्हे लिखने को प्रेरित करने के लिये एक ज्वाइण्ट ब्लॉग बनाया – शिवकुमार मिश्रContinue reading “शिवकुमार मिश्र का ब्लॉग”

वाटर मार्क लगाने का सॉफ्टवेयर


श्री पंकज अवधिया ने मुझे मीनाक्षी जी का चित्रों पर वाटरमार्क के लिंक बताने के लिये आग्रह करने वाला ई-मेल फार्वर्ड किया है। आप इस सन्दर्भ में  पिक्चर शार्क (Picture Shark)  नामक फ्रीवेयर से यह सुविधा पा सकते हैं। यह 0.795 MB  का सॉफ्टवेयर लिंक पर जा कर अपने कम्प्यूटर पर इंस्टाल करलें। इसे खोलनेContinue reading “वाटर मार्क लगाने का सॉफ्टवेयर”

खरपतवार बनाम खरपतवार नाशक


पंकज अवधिया जी इतना व्यस्त होते हुये  भी समय पर लिख कर अपना लेख मुझे भेज देते हैं। और उनके लेखों में विविधता-नयापन बरकरार रहता है। इस बार भी उन्होंने  बिल्कुल समय पर अपना आलेख भेज दिया। मैने उनके पिछले आलेख के पुछल्ले के रूप में गेंहूं के खेत का एक चित्र लगा दिया था।Continue reading “खरपतवार बनाम खरपतवार नाशक”

किल्लत का अर्थशास्त्र चल रहा है क्या?


कोटा-परमिट राज का जमाना था। तब हर चीज का उत्पादन सरकार तय करती थी। सरकार इफरात में नहीं सोचती। लिहाजा किल्लत बनी रहती थी। हर चीज की कमी और कालाबाजारी। उद्यमिता का अर्थ भी था कि किसी तरह मोनोपोली बनाये रखा जाय और मार्केट को मेनीप्युलेट किया जाय। खूब पैसा पीटा ऐसे मेनीप्युलेटर्स ने। परContinue reading “किल्लत का अर्थशास्त्र चल रहा है क्या?”