विदर्भ: मैं विक्तोर फ्रेंकल पर लौटना चाहूंगा


आठ महीने से अधिक हुये मैने विक्तोर फ्रेंकल के बारे में पोस्ट लिखी थी: विक्तोर फ्रेंकल का आशावाद और जीवन के अर्थ की खोज अब जब विदर्भ की आत्महत्याओं नें मन व्यथित किया है, तब इस पोस्ट की पुन: याद आ रही है। विदर्भ की समस्या वैसी ही जटिल है जसे नात्सी कंसंट्रेशन कैम्प कीContinue reading “विदर्भ: मैं विक्तोर फ्रेंकल पर लौटना चाहूंगा”