
बिगबैंग प्रयोग की सुरंग – एसोसियेटेड प्रेस का फोटो
मेरे घर व आसपास में रविवार से सनसनी है कि दस सितम्बर को प्रलय है। किसी टीवी ने खबर ठेली है। कहीं कोई मशीन बनी है जो धरती के नीचे (?) इतनी ऊर्जा बनायेगी कि अगर कण्ट्रोल नहीं हुआ तो प्रलय हो जायेगा। मैने टीवी नहीं देखा तो फण्डा समझ नहीं आया। फिर इण्टरनेट न्यूज सर्च से मामला फरियाया।
फ्रांस-स्विस सरहद पर १७ मील लम्बी सुरंग में नाभिकीय पार्टीकल स्मैशिंग प्रयोग होगा। उससे नयी विमाओं, ब्लैक होल, हिग्स बोसॉन आदि के बारें में ज्ञान और असीम जानकारी मिलेगी। इस पर दस बिलियन डालर का खर्च आयेगा। यह यूएसए टुडे में है।
यह खबर जेनेवा से है। वहां की सी.ई.आर.एन. लैब यह प्रयोग कर रही है। साठ हजार कम्प्यूटर इस प्रयोग से मिले डाटा का विश्लेषण करेंगे। यह ग्रिडकम्प्यूटिंग में भी सबसे बड़ा प्रयोग होगा।
द हिन्दू में लंदन डेटलाइन से खबर है कि उन वैज्ञानिकों को हत्या की धमकियां मिली हैं जो यह प्रयोग कर रहे हैं; क्योंकि “अगर बिगबैंग के बाद की दशा की पुन: रचना हुई तो प्रलय आ सकती है!”
यह तो हुई खबर की बात। अब मेरे घर और घर के आसपास जो हुआ वह मेरी पत्नीजी की कलम से:
ज्ञान के ऑफिस जाने के बाद मैं अपने कमरे को व्यवस्थित कर रही थी। डस्टर से टेलीफोन आदि पोंछ रही थी कि दीवार पर रमण महर्षि के चित्र के पास लटकते एक मकड़ी के जाले पर नजर पड़ी। मैने कुर्सी पर पैर जमा कर मेज पर चढ़ कर जाला उतारने का उद्यम प्रारम्भ किया। अचानक कुर्सी फिसली और मैं जमीन पर आ गिरी – मुझे लगा कि प्रलय आ ही गया। फिर अपने पास मैने संदीप और लद्द-फद्द चलते आते अपनी सासू मां को देखा तो लगा कि शायद अभी प्रलय टल गया है। …
जी हां; शिवकुटी में बड़ी सनसनी है। इण्डिया टीवी दिन भर से चिल्ला रहा है कि प्रलय आने को है, बस! कुछ मनचले वैज्ञानिक न्यूट्रान-प्लूटान-सूटान-अपट्रान जैसे परमाणविक भागों को विस्फोट करा ऐसा धमाका करेंगे कि धरती रसातल में चली जायेगी! सब पानी-पानी हो जायेगा। प्रसादजी की कामायनी के – “नीचे जल था, ऊपर हिम था, एक तरल था, एक सघन” छाप!
पड़ोस में पलक के बाबा जी ७८ साल के हैं। थोड़ा चलते हैं तो सांस फूलती है। वे भरतलाल के साथ योजना बना रहे हैं कि अपन हिमालय पर चलते हैं। प्रलय में सब खतम हो जायेंगे तो वापस आ कर शिवकुटी के सभी मकानों पर कब्जा कर लेंगे। भरतलाल हिमालय पर अपनी मंगेतर को भी साथ ले जाना चाहता है। प्रलय के बाद मनु-सतरूपा के रूप में वही चलायेगा सृष्टि! इस बीच मेरी लड़की वाणी का बोकारो से फोन आया। मैने बताया कि मैं मेज से गिर पड़ी। वह तुरंत चिल्ला कर बोली – संभाल कर रहा/चला करो; अब बुढ्ढी हो गयी हो। प्रलय की सनसनी अवसाद में बदल गयी। मेरी जवानी में इस लड़की ने मुझे बुढ्ढी कह दिया। इससे बड़ा प्रलय और क्या हो सकता है! |
ट्यूब खाली हो रही हो या नहीं, पत्नीजी चाहती हैं ब्लॉग पर गतिविधि रहे। लिहाजा मेरे दफ्तर से घर आने के पहले उन्होंने यह लिख कर रखा था कि मैं पोस्ट बनाने से न बच सकूं?!
Published by Gyan Dutt Pandey
Exploring rural India with a curious lens and a calm heart.
Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges.
Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh.
Writing at - gyandutt.com
— reflections from a life “Beyond Seventy”.
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FB Page : @gyanfb
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आशा है रीटा जी को चोट न आयी होगी। रीटा जी की लेखन शैली बहुत ही रोचक है। लिखती रहें
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कल की दुनिया में क्या होगा किसको पता। जो होगा सबके साथ होगा। फिर भी, इस प्रयोग का सीधा प्रसारण इंटरनेट पर देखा जा सकता है।
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आप सभी अपने अपने फ़ोन ना० मुझे दे दे, प्रलय सब से पहले मेरे यहा से हो कर गुजरे गी मे उसी समय आप सब को फ़ोन पर बता दुगां ओर सब लोग पलक के बाबा जी के साथ जल्दी से हिमाल्या पर चले जाये , जब प्रलय खतम हो जाये गी फ़िर आप को फ़ोन कर दुंगा फ़िर सभी वापिस आ कर जहा चाहॊ कब्जा कर लेना, लेकिन इस से पहले मुझे सलाह देने ओर मदद देने के लिये सभी लोग जिस इज्स ने बचना हे एक एक लाख pay pal से भेज दे. ओर ग्य्य्न जी आप भाभी जी का धयान रखे , ओर उन का पेर खुब दबाये, फ़िर हिमायल पर भी चढना हे, वेसे आप को फ़्रि मे बता दुगा, बस एक रेल का पास ले देनाधन्यवाद सुचना समापत हुयी
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अब ज्ञानजी को अपनी ट्यूब की कोई चिंता न होने चाहिये। घर में ही रिफ़ल स्टोर खुल गया है। जहां खाली हुये भरवा लिये। बिटिया ने बुढ्ढी पुरानी मेज के लिये कहा होगा। आपने सुना ही होगा कि लड़कियों को मायके की एक-एक चीज से प्यार होगा है। वे एक-एक चीज के बारे में चिंतित होती हैं। जब आपने गिरने की बात कही तो वो मेज जो कि पुरानी हो गयी है उसको बुढ्ढी बताकर उसके प्रति चिंता जाहिर की होगी। यहां मेज का मानवीकरण हुआ है। बाकी आपकी लेखन शैली इत्ती अच्छी है कि तारीफ़ करने का मन होरहा है। मुझे लगता है कि ज्ञान जी ने जो अच्छी सहज हास्य वाली पोस्टें लिखीं वे आपसे ही लिखवा कर पोस्ट की होंगी। आप लिखतीं रहें। बधाई आपको इत्ता अच्छा लिखने के लिये। :)
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एक दिन ओर बचा है सर जी !भाभी जी की जय हो……
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अरे भाभी आप ठीक तो है न। डॉक्टर को दिखाया या नही।दुनिता ख़त्म हो जायेगी ये तो पिछले एक हफ्ते से टी.वी.वाले दिखा रहे है और कुछ चैनल तो ग्रहों के बारे मे भी बता रहे है। देखें कल क्या होता है।वैसे अपने ब्लॉगिंग मे भी एक प्रलय आ चुकी है समीर जी के जाने की।
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गुरुदेव, आपका सिक्का तो चल निकला। अब आराम से ब्लॉग चटकाइए। घर में ही ‘रिलीवर’ मौजूद हो तो चिन्ता काहे की? क्या कहने…पोस्ट भी उतनी ही ताजगी और रोचकता वाली आ रही है… बधाई।
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बढिया ज्ञान और अपनी सी पोस्ट !ऐसा लग रहा है की घर में बैठ कर सब लोग आपस में गपिया रहे हैं !बहुत आनंद आया ! धन्यवाद !
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बड़ी देर से प्रलय की सूचना दी वरना मैं तो बैंक से लोन लेकर पूरे ऐश के साथ दो चार दिन जिंदगी जी लेना चाहता था लेकिन अब लोन प्रोसेस होते होते ही सबकुछ खत्म।
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aaspaas ki baten jyada rochak lagi….baaki to jo hona hoga wo hoga hi! ek baar jab ham bachche the tab skylab girna ki khabar jor se uchhli thi….tab bhi kuch aisa hi mahol tha.
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