अवसादहारिणी गंगा


गंगा किनारे जाना अवसाद शमन करता है। उत्फुल्लता लाता है।  उस दिन मेरे रिश्ते में एक सज्जन श्री प्रवीणचन्द्र दुबे [1] मेरी मेरे घर आये थे और इस जगह पर एक मकान खरीद लेने की इच्छा व्यक्त कर रहे थे। मैं घर पर नहीं था, अत: उनसे मुलाकात नहीं हुई। टूटी सड़क, ओवरफ्लो करती नालियांContinue reading “अवसादहारिणी गंगा”