आज ब्लॉगरी के सेमीनार से लौटा तो पत्नीजी गंगा किनारे ले गयीं छठ का मनाया जाना देखने। और क्या मनमोहक दृष्य थे, यद्यपि पूजा समाप्त हो गयी थी और लोग लौटने लगे थे।
चित्र देखिये:
तट का विहंगम दृष्य:

घाट पर कीर्तन करती स्त्रियां:
घाट पर पूजा:
सूप में पूजा सामग्री:
लौटते लोग:
Published by Gyan Dutt Pandey
Exploring rural India with a curious lens and a calm heart.
Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges.
Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh.
Writing at - gyandutt.com
— reflections from a life “Beyond Seventy”.
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दर्शन भये- धन्य भये..आपके आभारी.
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छट की पूजा तो हम भी पहली बार ही देख रहे हैं. एक बात हमने गौर की. आपके विहंगम दृश्य में १००-१२५ लोग ही दिखे.
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बहुत सुंदर चित्र हैं .. बिहार झारखंड के तालाबों , नदियों में भी छठ पूजा की सुंदरता देखते ही बनती है .. बडा पवित्र वातावरण महसूस होता है !!
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चित्र देखकर अच्छा लगा ।
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बढ़िया चित्र |दिल्ली में भी यमुना पर छट पूजा हुई है लेकिन हम वहां होने वाले जाम से निजात पाने के लिए आज काम बीच में ही छोड़कर चले आये | आपकी तरह फोटो आदि लेना भूल ही गए |हाँ अब सोमवार को ऑफिस में बिहारी बंधुओं से छट माता का प्रशाद खाने को जरुर मिल जायेगा | जय हो छट माता की |
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बहुत सुंदर चित्र, लेकिन हम हर पुजा के समय नदियो को क्यो गंदा करते है, यह दीप वगेरा ओर अन्य सामग्री क्या नदी मै वहा देने से ओर नदी के पानी को दुषित करने से ही भगवान खुश होते है??
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जीवन कितना तेज है -कहाँ से कहाँ पहुँच गए ज्ञान जी और हमें भी पहुंचा दिये !
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"आज ब्लॉगरी के सेमीनार से लौटा तो पत्नीजी गंगा किनारे ले गयीं " मैं सोच रहा हूँ कि इसके बाद छठ पूजा का वर्णन एवं इतने सुन्दर चित्र न होते तो इसका क्या अर्थ होता !!
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घाट और छठ पूजा के चित्र देख कर अच्छा लगा। मैं ने कभी छठ पूजा नहीं देखी। हो सकता है अब कोटा में भी हो रही हो। लेकिन उस का हल्ला कहीं नहीं दिखाई दिया। मैं कल्पना ही करता था कि छठ पूजा कैसी होती होगी। पर आप के चित्र और आज टीवी आदि पर देखते हुए ही पता लगा कि वे दृष्य मेरी कल्पना के चित्रों जैसे ही हैं। आखिरी चित्र नहीं दिख रहा है। लेकिन यह समस्या कुछ दिनों से देखने को मिल रही है कि पोस्टों के चित्र किसी को दिखाई देते हैं और किसी को नहीं। मेरे यहाँ नहीं दिखता औरों की उन पर टिप्पणियाँ ब्लाग में होती हैं। सम्मेलन के बारे में आप बिलकुल चुप रहे। कुछ तो बोलते, हम आप से जानना चाहते थे।
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वाह लाईव रिपोर्टिंग।कल हम दादर गये थे तो भी ट्रकों में महिलाओं और बच्चों को जाते हुए देखा था, अदभुत नजारा था पर हमारे मोबाईल का कैमरा इतना अच्छा नहीं था कि हम फ़ोटो खीच पाते।
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