सब के प्रति समान दुर्भावना के साथ (खुशवन्त सिंह का कबाड़ा पंच लाइन) –
By Anonymous on 6:12 AM
बाबा समीरानन्द ji ne Anup ji ki to baja baja diya aur aab agla number apka hi hai.
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हिन्दी भाषियों के लिये अनुवाद –
बेनामी जी की टिप्पणी मसिजीवी के ब्लॉग पर –
बाबा समीरानन्द जी ने अनूप जी का बाजा बजा दिया और अब अगला नम्बर आपका ही है।
Published by Gyan Dutt Pandey
Exploring rural India with a curious lens and a calm heart.
Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges.
Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh.
Writing at - gyandutt.com
— reflections from a life “Beyond Seventy”.
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नो कमेण्ट…। मैं असमर्थ हूँ।
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पोस्ट बाउंस हो गई है। कम से कम मेरी जो सौ दो सौ ग्राम की बुद्धी है, वह अपने तईं तो यही समझ रही है :) हलो चार्ली…1….2…3….फ्रीक्वेंसी प्लीज…..हलो चार्ली……:)
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.साधो ई सब अकथ कहानी ….'' सिर धुनि गिरा लागि पछिताना … '' .'' हियाँ न केउ कै केउ सुनवैया अपनेन मा है ता ता थैया ! '' .आभार ,,,
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आदरणीय ज्ञानदत्त जी,प्रणाम,आप के इस पोस्ट को समझने में मैं सर्वथा असमर्थ हूँ…क्योंकि उस पोस्ट में तो ज्यादातर टिपण्णी बेनामियों ने ही दी हैं….यह कमेन्ट हो सकता है इस बेनामी ने लिखा हो….देखिये .. 1. By Anonymous on 1:10 AM इस पर तो दिलमिलगये लिखा है… यह भी पाबला है क्या? लेकिन आगे क्या करना है… अगर मैं आपको पैसे दूं तो क्या आप करवा देंगी? मैं चिट्ठाचर्छा.नेट लेना चाहता हूं…या फिर बाकि के १० बेनामी कोम्मन्ट्स जिसने लिखा है उनमें से कोई हो….और फिर यह किसके लिए कहा गया है ??आपके लिए, मसिजीवी जी के लिए, पाबला जी के लिए, या फिर किसी और के लिए…खैर आपलोग बड़े हैं …ज्यादा समझदार भी ….लेकिन यहाँ हैरान हूँ देख कर कि किसी सिरफिरे की बात को कितनी अहमियत मिलती है….की पोस्ट निकल गयी….जब कि उसका नाम पता तक का ठीकाना नहीं…शायद यह हिंदी और हिंदी ब्लॉग जगत के विकास के लिए आवश्य है…:)क्षमा चाहूँगी लेकिन..जब आप जैसे प्रबुद्ध, प्रज्ञं और विद्वान् जो प्रातस्मरणीय हैं …अगर ऐसा करेंगे तो हम क्या सीख पायेंगे आप से…??मैं जानती हूँ….अब सब मेरे विरुद्ध हो जायेंगे लेकिन….मैं बिना कहे नहीं रह सकती…कि ये आप गलत कर रहे हैं…..एक बेनामी की बात पर आपसी सम्बन्ध दरक रहे हैं…..हैरान हूँ… सच !!!!
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siyapati raamchandr kee jay
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@ उड़न तश्तरी> पोस्ट का उद्देश्य ही नहीं समझ आया.————ओह, यह बताना था कि कितने भंगुर तरीके से टिप्पणियों में अनवाइण्ड हो रहे हैं लोग। और शायद यह शेर से समझाने की बात नहीं है। इस प्रकार के कथ्य (पोस्ट में बेनामी जी वाला) से अपनी असंपृक्तता स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करने का समय है। आप साधुवादी टिप्पणी के प्रवर्तक रहे हैं। पर यह साधुवादिता किसी का मन बढ़ाये, वह भी सही नहीं है। मित्र ही यह कह सकता है। देखें, आपके दूसरे मित्र अनूप क्या कहते हैं!
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पोस्ट का उद्देश्य ही नहीं समझ आया.एक शेर याद आया संजीव सलिल जी का:शिकवा न दुश्मनों से मुझको रहा 'सलिल'हैरत है दोस्तों ने ही प्यार से मारा.:)
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@ संजय बेंगाणी – हम तो मात्र शब्द ठेलक हैं। अर्थ बताने वाले तो दूसरे हैं – जिन्हें हिन्दी का विद्वान कहा जाता है।मेरे विचार से यण या यन प्रत्यय है जो मूल शब्द को एक Dimension या विमा या मार्ग देता है। कहीं कहीं यह संतति के अर्थ में भी आता है!आपको समझ आया? नहीं? खैर मुझे भी नहीं आया! :-)
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ये क्या हो रहा है ??????
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आप तो हमको "यन" या यण का अर्थ बता दें. क्या इसका अर्थ कथा होता है? जैसे रामायण, राम-कथा. शुक्र है बाजा बजा, मुकदमा नहीं हुआ.
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