टिप्पणीयन

सब के प्रति समान दुर्भावना के साथ (खुशवन्त सिंह का कबाड़ा पंच लाइन) –

By Anonymous on 6:12 AM

बाबा समीरानन्द ji ne Anup ji ki to baja baja diya aur aab agla number apka hi hai.

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हिन्दी भाषियों के लिये अनुवाद –
बेनामी जी की टिप्पणी मसिजीवी के ब्लॉग पर –
बाबा समीरानन्द जी ने अनूप जी का बाजा बजा दिया और अब अगला नम्बर आपका ही है।


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

22 thoughts on “टिप्पणीयन

  1. हजारों खावाहिशें ऐसी की हर खवाहिश पे दम निकले……इससे ज्यादा क्या कहे की ……..देख कर दुःख होता है जब कोई ये राग अलापता रहे की देखो ये मेरे हाँथ में कीचड है लोगो को इसे नहीं छूना चाहिए ..हो सके तो किसी बर्तन में ले कर दूसरे के मुह पर फेको

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  2. जिन्हें कुछ समझने मं असमर्थता हो रही है, वे केवल एक बात समझ लें किकुछ विशेष व्यक्तियों के ब्लॉग या पोस्ट पर बेनामी/ अनामी/ बेप्रोफाईल टिप्पणियाँ क्यों नहीं आती हैं?या फिर कुछ विशेष व्यक्तियों के ब्लॉग पर नहीं जाने वालो के ब्लॉग या पोस्ट पर बेनामी/ अनामी/ बेप्रोफाईल टिप्पणियाँ क्यों आती हैं?यदि इतनी सी बात वे समझ लें तो सब कुछ समझ में आ जाएगा

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  3. यह पोस्ट चिंगारी में हवन करने ख़ालिस उपक्रम है ।अनूप जी की टिप्पणी को मौज़िया मँत्रोचार माना जा सकता है ।इस पोस्ट का साध्य बस इतना ही है कि इस बहाने कुछेक लॉयल्टियाँ चिन्हित हो जायेंगी ।बकिया पाबला जी ने मेरी व्यथा स्पष्ट कर दी है, अगस्त 2007 से आजतक मैं एक बेनामी टिप्पणी को तरसता रहा ।मैंनें तो भड़काऊ-हड़काऊ लेखन से कभी भी परहेज नहीं किया, फिर भी…यानि कि बेनामी तक मुझे इस लायक नहीं समझता ! :)

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  4. जिन्हें कुछ समझने मं असमर्थता हो रही है, वे केवल एक बात समझ लें किकुछ विशेष व्यक्तियों के ब्लॉग या पोस्ट पर ही बेनामी/ अनामी/ बेप्रोफाईल टिप्पणियाँ क्यों आती हैं?यदि इतनी सी बात वे समझ लें तो सब कुछ समझ में आ जाएगा बी एस पाबला

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  5. बाबा समीरानन्द जी ने अनूप जी का बाजा बजा दिया और अब अगला नम्बर आपका ही है।कवि यहां जो कहना चाहता है वह आपने अनुवाद करके बता दिया है। बाबा समीरानन्द बाजा बजाने का काम करते हैं। वे अपनी सेवायें अनूप जी को प्रदान कर चुके हैं और अब आगे मसिजीवी को अपनी सेवायें देने के लिये कमर कस चुके हैं।इस पोस्ट का मंतव्य मुझे अच्छी तरह से समझ में आ रहा है। व्याख्याकार ज्ञानजी इशारे-इशारे में इस बात/ पृवत्ति की निन्दा कर रहे हैं कि लोग इस तरह बाजा बजाने की बात करते हैं। ज्ञानजी समझदार हैं! अन्य साधुवादियों के तरह वे अच्छे-बुरे (सूचना और धमकी) के प्रति समान नजर रखते हैं। समदर्शी नजरिया है इसलिये मसिजीवी की पोस्ट पर भी very nice लिखते हैं और मसिजीवी को अदालती धमकी देने वाली पोस्ट पर भी very nice! इस पोस्ट से इस बात की पुष्टि होती है कि ज्ञान जी के अंदर एक खिलंदड़ा बालक भी मौजूद है जो बेवकूफ़ी की बातों की खिल्ली उडा़ना जानता है। लेकिन बालक को यह एहसास नहीं है कि उसकी टिप्पणियों को जो दूसरे देखेंगे वे यह नहीं समझ पायेंगे कि ज्ञानजी की बात का असल मतलब क्या है। आपका very nice का मतलब वहां डिक्शनरी वाला ही निकाला जायेगा। (—बहुत अच्छा किया जी आपने मसिजीवी का इलाज तो करना ही चाहिये)मैं तो बहुत अच्छी तरह समझता हूं कि आपके मंतव्य ऐसे कतई नहीं हैं। आप इस सब प्रवृत्तियों के खिलाफ़ हैं लेकिन आम जनता आपकी टिप्पणियों से यही समझेगी। आपके हाथ में ऐसी कोई ताकत नहीं है कि आप अपने दोनों very nice को हायपर लिंक से अपने मन तक पहुंचा दें और लोग आपके कहे का असल मतलब समझ लें।मेरी अपनी समझ है कि अगर हम किसी बात को सही और गलत को समझ सकने में सक्षम हैं तो सही के साथ स्पष्ट रूप से खड़े होने का प्रयास करें। अगर सही के साथ खड़े होने की हिम्मत न जुटा सकें तो कम से कम ऐसे तो न खड़े हों कि गलत भी अपने समर्थकों में हमको शामिल कर ले।सही को सही न कह सकें तो कम से कम ऐसा तो कुछ न कहें कि जिससे यह लगे कि गलत को आप सही ठहरा हैं।यह बात इसलिये कही क्योंकि आपने पूछा था। आपकी पोस्ट समझने में मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। सुन्दर, सामयिक पोस्ट! :)

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  6. चचा पर भी फागुन का असर हो गया है का? हा हा हा।एक ठो बंदिश टेल ही दीजिए। इस समय आप कर सकते हैं।गुस्सा आए तो पहली भूल समझ माफ कर दीजिएगा।

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