गंगा के पानी की पम्पिंग कर सिंचाई


गंगाजी की रेती के कछार में लोग नेनुआ, लौकी, कोंहड़ा, तरबूज, खीरा और ककड़ी की खेती करते हैं। यह काम दीपावली के बाद शुरू होता है। इस समय यह गतिविधि अपने चरम पर है। आप इस विषय में कई पहले की पोस्टें गंगा वर्गीकरण पर खंगाल सकते हैं। मैने पिछली पोस्ट में बताया था  किContinue reading “गंगा के पानी की पम्पिंग कर सिंचाई”

जकड़े हुये राणा प्रताप


एक समय था, जब शहरों में चिड़ियां और कौव्वे बहुतायत से थे और चौराहे पर लगी मूर्तियां उनकी बीट से गंदी हुआ करती थीं। अन्यथा उनको इज्जत बक्शी जाती थी। अब चिड़ियां कव्वे गायब हो गये हैं। सो बीट की समस्या कम हो गई है। पर इज्जत-फिज्जत भी गायब हो गई है। उसका स्थान लेContinue reading “जकड़े हुये राणा प्रताप”

डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?


तरुण जी ने पिछली पोस्ट (डिसऑनेस्टतम समय) पर टिप्पणी मेँ कहा था: Edmund Burke का एक अंग्रेजी quote दूंगा: “The only thing necessary for the triumph of evil is for good people to do nothing.” समाज की इस दशा के लिए कोई और नहीं हम खुद ही जिम्मेदार है खासकर पिछली पीढ़िया। इसे ठीक भीContinue reading “डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?”