गंगा के पानी की पम्पिंग कर सिंचाई



गंगाजी की रेती के कछार में लोग नेनुआ, लौकी, कोंहड़ा, तरबूज, खीरा और ककड़ी की खेती करते हैं। यह काम दीपावली के बाद शुरू होता है। इस समय यह गतिविधि अपने चरम पर है।

आप इस विषय में कई पहले की पोस्टें गंगा वर्गीकरण पर खंगाल सकते हैं।

मैने पिछली पोस्ट में बताया था  कि गंगाजी की रेती में कल्लू के खेत में पानी का कुंआ है। लोगों को गगरा-मेटी से इस प्रकार के कुंये से पानी निकाल कर सिंचाई करते मैने देखा था। Continue reading “गंगा के पानी की पम्पिंग कर सिंचाई”

जकड़े हुये राणा प्रताप



एक समय था, जब शहरों में चिड़ियां और कौव्वे बहुतायत से थे और चौराहे पर लगी मूर्तियां उनकी बीट से गंदी हुआ करती थीं। अन्यथा उनको इज्जत बक्शी जाती थी।

अब चिड़ियां कव्वे गायब हो गये हैं। सो बीट की समस्या कम हो गई है। पर इज्जत-फिज्जत भी गायब हो गई है। उसका स्थान ले लिया है शुद्ध छुद्र राजनीति ने। Continue reading “जकड़े हुये राणा प्रताप”