श्यामबिहारी चाय की दुकान पर


श्यामबिहारी काँधे पर फरसा लिए चाय की चट्टी पर आये। अरुण से एक प्लेट छोला माँगा और सीमेंट की बेंच पर बैठ खाने लगे। खाने के बाद एक चाय के लिए कहा। “जल्दी द, नाहीं अकाज होये”। जल्दी दो, देर हो रही है।  श्यामबिहारी का परिचय पूछा मैंने। मेरे घर के पास उनकी गुमटी है।Continue reading “श्यामबिहारी चाय की दुकान पर”