उनके हाथ में स्वाद है – रामधारी यादव और संजय शुक्ला की केन्टीन


रामधारी सीनियर हैं सूर्या ट्रॉमा सेंटर की केन्टीन में और संजय शुक्ला कुक हैं. उन दोनों की टीम 50 बिस्तर के इस अस्पताल के मरीजों, डाक्टरों और कर्मचारियों को भोजन देती है.

हमारा घर अस्पताल से पास में है – 10 किलोमीटर दूर. अस्पताल में हमारे लिए भोजन घर से ही आता है. फिर भी एक दो बार हमने कैंटीन का इस्तेमाल किया. और हमें सरप्राइज मिला. खाना अपेक्षा से ज्यादा घरेलू था और सुस्वादु भी. यह भी लगा कि उसका स्वाद मसालों के प्रयोग से नहीं, अन्न और सब्जियों की गुणवत्ता तथा बनाने वाले की कार्य कुशलता से उपजा है.

मेरी पत्नीजी ने कहा – खाना बनाने वाले के हाथ में स्वाद है.

केन्टीन के रसोईया, संजय शुक्ल

केन्टीन में नाश्ते और खाने की लिस्ट में उत्तर और दक्षिण भारतीय व्यंजनों की लिस्ट टंगी है. संजय ने बताया कि वह सब उपलब्ध कराने की योजना है. पर अभी मांग कम होने के कारण नाश्ते में केवल पूरी सब्जी और खाने में दाल चावल रोटी सब्जी बनता है.

“समोसा का इंतजाम करें और दिन भर में एक ही ग्राहक समोसे का मिले तो बहुत सामग्री बर्बाद होगी. इसलिए कुछ समय और देख कर आइटम बढ़ायेंगे.” – संजय ने बताया.

संजय कुक हैं और रामधारी यादव केन्टीन के कर्ता धर्ता. रामधारी घूम घूम कर ऑर्डर भी लेते हैं, लोगों को बताते भी हैं कि कैसे और कितने का काउंटर पर कूपन लेना है. रामधारी टफ लगते हैं, पर हैं रोचक व्यक्ति. मैं उनके पास 4 लंच का ऑर्डर देने गया. हम पति पत्नी यदा कदा एक लंच टिफिन लेते थे. उसमें दोनों के लिए पर्याप्त भोजन होता है. चार लंच के बारे में मैंने कहा कि पिताजी को देखने के लिए लोग आ रहे हैं, उनको भोजन करना है.

सूर्या ट्रॉमा सेंटर की केन्टीन के कर्ता धर्ता – रामधारी यादव

रामधारी ने इसपर एक किस्सा सुनाया. एक आदमी पेड़ से गिर गया तो टांग टूट गई. अस्पताल में भर्ती किया गया. ऑपरेशन कर हड्डी जोड़ी गई. प्लास्टर लगा. चूंकि उसे गाँव देहात में बहुत लोग जानते थे, बहुत से लोग अस्पताल देखने आने लगे. उनके चाय पानी पर खर्चा होने लगा. कुछ देखने वाले दूर से आते थे और उन्हें भोजन भी कराना होता था. एक दो दूर वाले दो तीन रोज रुक भी जाते थे.

एक देखने आने वाले ने पूछा – चच्चा, टांग कब टूटी?

मरीज ने जवाब दिया. “टांग पहले नहीं टूटी थी. टांग तो (यहां देखने आने वालों की आवभगत में) अब टूट गई है.” :lol:

मुझे लगता है कि आपके और रामधारी के पास अगर बातचीत करने का समय हो तो रामधारी की रोचक बातें आपको बाँध सकती है.

केन्टीन का भोजन कक्ष

केन्टीन में बैठने की व्यवस्था है. जो लोग कमरों या वार्ड में भोजन करना चाहते हैं, उनके लिए तीन खाने वाले मिल्टन के इनस्युलेटेड टिफिन बॉक्स भी उपलब्ध हैं. दिन में दो बार रामधारी घूम घूम कर लोगों को चाय पिला देते हैं. अस्पताल में हर कोई उन्हें यादव जी के नाम से जानता, संबोधित करता है.

कुल मिला कर अच्छी और सस्ती सुविधा कही जाएगी यह कैंटीन और उसके अच्छे और जानदार घटक हैं संजय और यादव जी.

कमरों और वार्ड में दिया जाने वाला भोजन इन टिफिन डिब्बों में होता है.

Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

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