सभाजीत मिश्र का आतिथ्य


गंगा किनारे मिल गए सभाजीत। एक बांस ले कर आए थे। घर में मनौती है गंगा जी को आरपार की माला चढ़ाने की। उसके लिए किनारे पर यह बांस गाड़ा जाएगा. उससे एक रस्सी ले कर नाव में निकलेंगे उत्सव मनाते परिवार के लोग। रस्सी में कुछ कुछ अन्तराल में आम की टेरी और फूलContinue reading “सभाजीत मिश्र का आतिथ्य”

राजेंद्र का बेल फल तोड़ने का खोंचा


उसने बिना चोटिल किए छोटे बड़े कुल सवा सौ बेल तोड़े। उसमें से उसे करीब चालीस मिले मेहनताना के रूप में। इस तरह 4-5 घंटे की मेहनत में राजेंद्र ने 1000 रुपये कमाए। बढ़िया ही कहा जाएगा यह उद्यम!

चाय की दुकान वाले दम्पति


दम्पति हर बात में ईश्वर को याद करते और परम सत्ता की नियामत की कृतज्ञता व्यक्त करते दिखे। मैने आमदनी के बारे में पूछा तो जवाब वही मिला – भगवान की कृपा है। सब ठीक से चल जाता है।