गेर वाली हौ रे, साइकिल


नई बिजली वाली साइकिल लेकर इन दिनों गांव-देहात में घूम रहा हूँ। जैसे ही घर से निकलता हूँ, बारह-पंद्रह किलोमीटर का इलाका मेरी रोज़ की छोटी दुनिया बन जाता है। कच्ची सड़कें, खेतों की हवा, कहीं किसी घर से उठती उपलों  के चूल्हे की गंध—और बीच-बीच में बच्चों के चिल्लाने की आवाज़। सफ़र खुद-ब-खुद मुस्कुरानेContinue reading “गेर वाली हौ रे, साइकिल”

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