एक पोते की स्मृति और अपना ही भविष्य टटोलने की कोशिश। मैं छोटा था। चार साल का। बब्बा एक लाठी लिए, धोती-बंडी पहने स्कूल को निकलते थे। पास के गांव शम्भू के पूरा में प्राइमरी के हेड मास्टर थे। बच्चे बहुत डरते थे। बड़े भी उन्हें आते देख पगडंडी से नीचे उतर जाते थे। अपनेContinue reading “मेरे बाबा का समय”
Category Archives: Memoir
सवेरे के सपने
धूमिल यादें प्रोस्टेट की दवाई अब अपने हिसाब से काम करने लगी है। रात में दो-तीन बार उठना होता है, कभी-कभी चार बार भी। किताबों में और यूट्यूब वाले बताते हैं कि शाम छह बजे के बाद पानी न पिया जाए, तो बेहतर रहता है। पर वह सब किताबी बातें हैं। रात तीन बजे नींदContinue reading “सवेरे के सपने “
पैदल चलती महिलायें
धूमिल यादें मेरे घर के सामने की सड़क से भांति-भांति के लोग आते-जाते हैं। हर एक के पास अपनी कहानी होगी। सवेरे बनारस और प्रयागराज जाने वाली पैसेंजर पकड़ने वाले लोग गुजरते हैं—तेज़ चाल चलते हुए। कभी गोद में एक बच्चा लिये और दूसरे को लगभग घसीटती महिलायें दिखती हैं। कभी सिर पर बेलपत्र औरContinue reading “पैदल चलती महिलायें “
