संगम क्षेत्र में कल्पवासी दम्पति


त्रिनाथ मिश्र अपनी पुस्तक कुम्भ गाथा की प्रस्तावना में लिखते हैं – तीन प्रकार के तीर्थ होते हैं – जंगम, मानस और स्थावर। जंगम तीर्थ चलते फिरते तीर्थ हैं। उस आधार पर मुझे लगता है कि सही अनुशासन में कल्पवास करते बाजपेई दम्पति भी जंगम तीर्थ हैं। दो दिन पहले मेरे पास अवसर था उनसेContinue reading “संगम क्षेत्र में कल्पवासी दम्पति”

राजकुमार सेठ उर्फ बाबा प्रधान


कोहरा न हो, बाजार कुनमुनाता सा खुल रहा हो और आप जिस दुकान के लिये अपनी लिस्ट ले कर साइकिल से निकले हों, वह अभी खुली न हो तो तय मानिये कि या तो आपको खीझ होगी या नई कहानी मिलेगी। मैं सवेरे आठ बजे ही घर से निकल लिया था। साइकिल बिजली वाली थीContinue reading “राजकुमार सेठ उर्फ बाबा प्रधान”

होम-कल्पवास का प्रयोग


होम-कल्पवास का ट्रायल रन लेना शुरू कर रहा हूं। कल्पवास में तो प्रयागराज के संगम पर कुटिया बना माघ मास व्यतीत करने का अनुशासन है। पर कल पढ़ा कि सेमराधनाथ में भी लोग कल्पवास कर रहे हैं। अर्थात कल्पवास में संगम-गंगा सानिध्य की मानसिक अवधारणा तो कहीं भी, किसी तरह की जा सकती है। …Continue reading “होम-कल्पवास का प्रयोग”

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