पूरन वर्मा की झंझरी


 < गांवदेहात डायरी > तापक्रम चालीस डिग्री छूने लगा है। अब मिट्टी का मटका लेने का समय आ गया है। बाबू सराय में अमूल दूध वाले महेंद्र सिन्ह जी से पूछा—“आसपास कहीं मटकी की दुकान है? टोंटी लगी मटकी वाली?” उन्होंने बताया—“आगे करीब दो सौ मीटर पर एक दुकान है, अच्छी-अच्छी मिट्टी की चीजें मिलतीContinue reading “पूरन वर्मा की झंझरी”

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