औरंगाबाद के रंजन कुमार


गांवदेहात डायरी वह आगे चलता दिखा—दो झंडे लिये। एक तिरंगा और एक धर्म को दर्शाता तिकोना। मैं पीछे से साइकिल पर था। चलते-चलते ही उसका चित्र लिया और फिर उसके पास जाकर साइकिल रोक दी। पूछा—यह क्या लिये हैं और कहां जा रहे हैं? उसने कहा—“राधे राधे।” मैंने अपना प्रश्न दो बार दोहराया। दोनों बारContinue reading “औरंगाबाद के रंजन कुमार”

Design a site like this with WordPress.com
Get started