घड़ी, साइकिल, बाजा बनाम राइडर


मेरे बचपन में दहेज का मानक था — घड़ी, साइकिल और बाजा – रेडियो। तेल से चुआती जुल्फी टेये नई शादी वाला दुलहा गांव में साइकिल ले कर घड़ी पहने और रेडियो पर बिनाका गीत माला सुनता निकलता था। जलवा होता था। अब समय बहुत बदल गया है। बगल में शादी तय हुई है। छेकईयाContinue reading “घड़ी, साइकिल, बाजा बनाम राइडर”

Design a site like this with WordPress.com
Get started