कल प्रेमनारायण मिश्र जी रात पौने नौ बजे आये। वे चित्रकूट धाम से लौट रहे थे और आज होने वाले भंडारे का निमंत्रण देने आये थे। रात का समय, यात्रा की थकान, और उसके बावजूद उनका आग्रह—इससे ही आयोजन का भाव समझ में आ रहा था। प्रेमनारायण जी के यहां सात दिवसीय महामृत्युंजय मंत्र-जाप हुआContinue reading “महामृत्युंजय पाठ का भंडारा – अगियाबीर की एक शाम”
