अचिन्त्य पहले नॉन रेलवे के अपरिचित हैं जो गोरखपुर में मुझसे मिलने मेरे दफ्तर आये। गोरखपुर में पीढ़ियों पहले से आये बंगाली परिवार से हैं वे। उन्होने बताया कि उनका परिवार सन 1887 में बंगाल से यहां आया। सवा सौ से अधिक वर्षों से गोरखपुरी-बंगाली! अठ्ठारह सौ अस्सी के समय में बहुत से बंगाली परिवारContinue reading “अचिन्त्य लाहिड़ी”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
चेत राम
मैं उन्हे गंगा किनारे उथले पानी में रुकी पूजा सामग्री से सामान बीनने वाला समझता था। स्केवेंजर – Scavenger. मैं गलती पर था। कई सुबह गंगा किनारे सैर के दौरान देखता हूं उन्हे एक सोटा हाथ में लिये ऊंचे स्वर में राम राम बोलते अकेले गंगा के उथले पानी में धीरे धीरे चल कर पन्नियों,Continue reading “चेत राम”
गोरखपुर रेलवे कॉलोनी में सवेरे की सैर
सवेरे की सैर का मजा गोरखपुर रेलवे कॉलोनी में उतना तो नहीं, जितना गंगाजी के कछार में है। पर वृक्ष और वनस्पति कछार की रेत, सब्जियों की खेती और चटक सूर्योदय की कुछ तो भरपाई करते है हैं। आजकल फागुन है तो वसन्त में वृक्षों में लदे फूलों की छटा कुछ और ही है। वृक्षContinue reading “गोरखपुर रेलवे कॉलोनी में सवेरे की सैर”
