हाथ से मछली बीनते बच्चे – तकनीक का विकास


वे पहले हाथ से बीन रहे थे मछली। आज देखा तो पाया कि उन्होने तकनीक विकसित कर ली है। उसी जगह एक चादर का प्रयोग बतौर जाल के रूप में कर रहे थे। गंगाजी के पानी से बने तालाब में एक ओर से शुरू कर दूसरी ओर तक ला रहे थे चादर को। कोशिश करContinue reading “हाथ से मछली बीनते बच्चे – तकनीक का विकास”

हाथों से मछली बीनते बच्चे


वे चार बच्चे थे। गंगाजी जब बरसात के बाद सिमटीं तो छोटे छोटे उथले गढ्ढे बनने लग गये पानी के।  उनमें हैं छोटी छोटी मछलियां। पानी इतना कम और इतना छिछला है कि हाथों से मछलियां पकड़ी जा सकती हैं। वे चारों हाथ से मछली पकड़ रहे थे। पकड़ना उनके लिये खेल भी था। एकContinue reading “हाथों से मछली बीनते बच्चे”

सिविल सर्विसेज़ का बदलता स्वरूप – श्री विवेक सहाय से मुलाकात का जिक्र


पिछले दिनों भारतीय नौकरशाही में हो रहे चरित्रगत परिवर्तनों के बारे में अहसास के दो अवसर मेरे समक्ष आये। एक था, फॉर्ब्स इण्डिया पत्रिका में एक पुस्तक की समीक्षा पढ़ने के रूप में और दूसरा था, हाल ही में रिटायर हुये रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री विवेक सहाय से मुलाकात के रूप में। मैं दोनोContinue reading “सिविल सर्विसेज़ का बदलता स्वरूप – श्री विवेक सहाय से मुलाकात का जिक्र”

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