अघोरी


अलाव तापता जवाहिरलाल, लोग और सबसे बायें खड़े पण्डाजी जवाहिरलाल को दो गर्म कपड़े दिये गये। एक जैकेट और दूसरा स्वेटर। ये देने के लिये हम इंतजार कर रहे थे। पैर के कांच लगने की तकलीफ से जवाहिरलाल लंगड़ा कर चल रहा था। दूर वैतरणी नाले के पास आता दिखा। उसे अपने नियत स्थान परContinue reading “अघोरी”

देव दीपावली @


मेरी गली में कल रात लोगों ने दिये जला रखे थे। ध्यान गया कि एकादशी है – देव दीपावली। देवता जग गये हैं। अब शादी-शुभ कर्म प्रारम्भ  होंगे। आज वाराणसी में होता तो घाटों पर भव्य जगमहाहट देखता। यहां तो घाट पर गंगाजी अकेले चुप चाप बह रही थीं। मैं और मेरी पत्नीजी भर थेContinue reading “देव दीपावली @”

हाँकोगे तो हाँफोगे


विवाह के तुरन्त बाद ही मुझे एक विशेष सलाह दी गयी: ’हाँकोगे तो हाँफोगे’ गूढ़ मन्त्र समझ में आने में समय लगता है| हर बार विचार करने में एक नया आयाम सामने आता है। कुछ मन्त्र तो सिद्ध करने में जीवन निकल जाते हैं। यह पोस्ट श्री प्रवीण पाण्डेय की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। प्रवीणContinue reading “हाँकोगे तो हाँफोगे”

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