ज्ञानदत्त मोनोपोली ध्वस्त होने की आशंका से परेशान!!!


ज्ञानदत्त बड़े परेशान हैं. उस क्षण को कोस रहे हैं, जब संजय कुमार ने उनसे कहा था कि उन्होने “हलचल” वाला ब्लॉग खोज लिया है और टिप्पणी कैसे की जाये? ज्ञानदत्त जी को लग रहा है कि सही रिस्पॉंस होना चाहिये था – “बन्धु, कल राजधानी एक्सप्रेस 20 मिनट टुटुहूंटूं स्टेशन पर खड़ी रही थीContinue reading “ज्ञानदत्त मोनोपोली ध्वस्त होने की आशंका से परेशान!!!”

अफगानिस्तान, अफीम और आतंकवाद


मेरा सोचना था कि खनिज तेल की अर्थव्यवस्था इस्लामी आतंकवाद को धन मुहैया कराती है और जब तेल का वर्चस्व समाप्त हो जायेगा, तो आतंकवाद को फण्ड करने का जरीया नहीं बचेगा और इस्लाम पुन: एक प्रेम और भाईचारे पर आर्धारित, मानवीय समानता की अपनी पुरानी पहचान पर लौटेगा. पर कल इकॉनमिस्ट में छपे एकContinue reading “अफगानिस्तान, अफीम और आतंकवाद”

संजय कुमार, रागदरबारी और रेल के डिब्बे


कल मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब संजय कुमार (जो हमारे चीफ रोलिंग स्टॉक इंजीनियर हैं) ने इण्टरकॉम पर मुझसे पूछा कि मेरा ब्लॉग तो उन्होने गूगल सर्च से ढ़ूंढ़ लिया है, पर अब हिन्दी में टिप्पणी कैसे करें. यह अच्छा था कि कुछ ही दिन पहले मैने हिन्दी ट्रांसलिटरेशन औजार ब्लॉग पर लगाया था. मैनेContinue reading “संजय कुमार, रागदरबारी और रेल के डिब्बे”

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