भईया, मन्दिर में राम कैद तो नहीं होंगे.


अभय तिवारी ने बडी़ सुन्दर पोस्ट लिखी भगवान राम पर. लेकिन किसी मजबूरी वश पोस्ट में चलते-चलते लीप-पोत दिया. राम मन्दिर अयोध्या में बनाने में आस्था डगमगा गयी. मंदिर में राम बंधक नजर आने लगे. यह मजबूरी बहुतों की है. लोग मुसलमान यार-दोस्तों की यारी एक पत्थर के मंदिर के नाम पर तोड़ना नहीं चाहते.Continue reading “भईया, मन्दिर में राम कैद तो नहीं होंगे.”

क्रिकेट पर रुदन बेचने का मौसम है मित्र!


शिव मिश्र लिखते हैं कि क्रिकेट पर मीडिया का रुख अच्छा नहीं है. मीडिया माने टीवी वाले. कई दिनों से टीवी वाले माइक और कैमरा ताने हैं. कई आतंकवादी बैनर हेडलाइन दिखा रहे हैं – “शेर हो गये ढेर” या “नाक कटा दी”. टीवी पर जो कहते हैं, उसका सार है कि “क्रिकेट वाले अच्छाContinue reading “क्रिकेट पर रुदन बेचने का मौसम है मित्र!”

निरालाजी के इलाहाबाद पर क्या गर्व करना?


मुझे एक सज्जन ने पूरे फख्र से मेरी पोस्ट पर टिप्पणी में कहा है कि वे निराला के इलाहाबाद के हैं. उसपर एक अन्य मित्र ने बेनाम टीप करते हुये निरालाजी की मन्सूर से तुलना की है – “अगर चढ़ता न सूली पर तो वो मन्सूर क्या होता”. निराला, जैसा मुझे मालूम है, इलाहाबाद मेंContinue reading “निरालाजी के इलाहाबाद पर क्या गर्व करना?”

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