किनारा नहीं दिखता था। इस किनारे इक्का दुक्का लोग भर थे स्नान करते। कोई नाव भी नहीं। कोई बंसी लगा मछली पकड़ते हुये भी नहीं था। पक्षी भी कम ही दिखे। अचानक प्रयाग की ओर से एक खाली मोटरबोट आती दिखी। दूर से ही उसकी आवाज आ रही थी। कोहरे को चीरती आ रही थीContinue reading “कोहरे में गंगा और मोटरबोट”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
“गंगा का पानी निर्मल है, पीने का मन करेगा”
मुझसे बात करने के लिये कमलेश बोले – “गुरूजी, आप तो बुद्धिमान हैं। आप तो जानते होंगे कि क्या रात बारह बजे गंगाजी एक बारगी बहना बंद कर थम जाती हैं?”
बदलते समय में संत लाल
संतलाल दुकान पर बैठते हैं, ग्राहक से बोलते, बतियाते और डील करते हैं। उस हिसाब से वे ‘चलन’ में हैं। पर आगे हर मशीन, हर गैजेट में एआई घुस जायेगा। तकनीकी के प्रति निस्पृहता कितनी और कैसे कायम रख कर प्रासंगिक बने रहेंगे?
