और आदतन मैं अपने को उस व्यक्ति के शरीर में रूपांतरित कर लेता हूं। और तब मुझे जो लगता है, वह डराने वाला है – बहुत भयावह! अपने कोर में भयभीत होने पर मैं अपने आप से मन में अनवरत बोलने लगता हूं – अंग्रेजी में!
Category Archives: आत्मविकास
जो दिखता हूँ, वह लिखता हूँ
प्रवीण पाण्डेय से उनकी पिछली पोस्ट स्ट्रीट चिल्ड्रन के बारे में पूछ लिया गया कि समारोह में मुख्य अतिथि बनने के अलावा आपका योगदान क्या रहा? इस बारे में प्रवीण पाण्डेय ने बहुत गहरे में सोचा। उसके बाद जो ई-मेल मुझे भेजी, वह अपने आप में महत्वपूर्ण पोस्ट है। मैं उस ई-मेल को जस काContinue reading “जो दिखता हूँ, वह लिखता हूँ”
उत्कृष्ट का शत्रु
मैने पढ़ा था – Good is the enemy of excellent. अच्छा, उत्कृष्ट का शत्रु है। फर्ज करो; मेरी भाषा बहुत अच्छी नहीं है, सम्प्रेषण अच्छा है (और यह सम्भव है)। सामाजिकता मुझे आती है। मैं पोस्ट लिखता हूं – ठीक ठाक। मुझे कमेण्ट मिलते हैं। मैं फूल जाता हूं। और जोश में लिखता हूं। जोशContinue reading “उत्कृष्ट का शत्रु”
