दीपक पटेल जी की सोच


दीपक पटेल जी कौन हैं – पता नहीं। मेरी राजभाषा बैठक के दौरान इधर उधर की वाली पोस्ट में बापू के लिखे के अनुवाद पर उनकी रोमनागरी में हिन्दी टिप्पणियां हैं। कोई लिंक नहीं है जिससे उनका प्रोफाइल जाना जा सकता। पर उन्होनें जो टिप्पणियों में लिखा है; उसके मुताबिक वे बहुत प्रिय पात्र लगतेContinue reading “दीपक पटेल जी की सोच”

भय, विश्वास और कर्मयोग


हर एक के जीवन में अवसर आते हैं जब नयी अपेक्षायें होती हैं व्यक्ति से। नेतृत्व की विविधता की आवश्यकता बनती है। पर लोग उसे फेस करने या उस पर खरा उतरने से बचते हैं। बहुत कुछ अर्जुन विषाद की दशा होती है। जब कर्म की अपेक्षा होती है तो मन उच्चाटन की दिशा मेंContinue reading “भय, विश्वास और कर्मयोग”

संयम और कछुआ


श्री अरविन्द आश्रम की रतलाम शाखा के सन्त थे श्री स्वयमप्रकाश उपाध्याय। उनके साथ मुझे बहुत करीब से रहने और उनका आशीर्वाद प्रचुर मात्रा में मिलने का संयोग मिला। उनका मेरे सत्व के (जितना कुछ भी उभर सका है) उद्दीपन में बहुत योगदान है। श्री उपाध्याय मुझे एक बार श्री माधव पण्डित (जो पॉण्डिच्चेरी केContinue reading “संयम और कछुआ”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free