कोलम्बस और कृष्ण


इन्द्रजी ने अपने ब्लॉग इन्द्राज दृष्टिकोण पर एक बहुत रोचक आख्यान कोलम्बस के सम्बन्ध में बताया है। सन १५०४ में चन्द्र ग्रहण ने कोलम्बस और उसके नाविकों की प्राण रक्षा की थी। वे जमैका के तट पर अटके थे। स्थानीय लोग बहुत विरोध कर रहे थे उनका। खाने की रसद समाप्त हो रही थी। औरContinue reading “कोलम्बस और कृष्ण”

पारिवारिक कलह से कैसे बचें


ज हां मैं रहता हूं , वह निम्न मध्यमवर्गीय मुहल्ला है। सम्बन्ध , सम्बन्धों का दिखावा , पैसा , पैसे की चाह , आदर्श , चिर्कुटई , पतन और अधपतन की जबरदस्त राग दरबारी है। कुछ दिनों से एक परिवार की आंतरिक कलह के प्रत्यक्षदर्शी हो रहे हैं हम। बात लाग – डांट से बढ़Continue reading “पारिवारिक कलह से कैसे बचें”

अभी कहां आराम बदा…


पश्चिम रेलवे के रतलाम मण्डल के स्टेशनों पर रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता का हिन्दी अनुवाद टंगा रहता था। यह पंक्तियां नेहरू जी को अत्यन्त प्रिय थीं: गहन सघन मनमोहक वन, तरु मुझको याद दिलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैने याद मुझे आ जाते हैं अभी   कहाँ आराम बदा यह मूक निमंत्रण छलना हैContinue reading “अभी कहां आराम बदा…”

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