दीन दयाल बिरद सम्भारी – पुन: दृष्टि


एक साल गुजर गया। मैने पहली पोस्ट लिखी थी इस ब्लॉग पर २३ फरवरी’२००७ को। एक अनगढ़ पोस्ट – दीनदयाल बिरद सम्भारी। आज उसे देखता हूं तो लगता है बहुत पानी बह गया है गंगा में। लिखने का तरीका, फॉण्ट का प्रयोग, प्रेजेण्टेन और वैचारिक परिपक्वता – सब में अन्तर है। भाषा में प्रवाह पहलेContinue reading “दीन दयाल बिरद सम्भारी – पुन: दृष्टि”

कोलम्बस और कृष्ण


इन्द्रजी ने अपने ब्लॉग इन्द्राज दृष्टिकोण पर एक बहुत रोचक आख्यान कोलम्बस के सम्बन्ध में बताया है। सन १५०४ में चन्द्र ग्रहण ने कोलम्बस और उसके नाविकों की प्राण रक्षा की थी। वे जमैका के तट पर अटके थे। स्थानीय लोग बहुत विरोध कर रहे थे उनका। खाने की रसद समाप्त हो रही थी। औरContinue reading “कोलम्बस और कृष्ण”

पारिवारिक कलह से कैसे बचें


ज हां मैं रहता हूं , वह निम्न मध्यमवर्गीय मुहल्ला है। सम्बन्ध , सम्बन्धों का दिखावा , पैसा , पैसे की चाह , आदर्श , चिर्कुटई , पतन और अधपतन की जबरदस्त राग दरबारी है। कुछ दिनों से एक परिवार की आंतरिक कलह के प्रत्यक्षदर्शी हो रहे हैं हम। बात लाग – डांट से बढ़Continue reading “पारिवारिक कलह से कैसे बचें”

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