दूसरी पारी – माधोसिंह रेलवे स्टेशन पर ट्रांजिट


चील्ह से गंगा उसपार मिर्जापुर बिंध्याचल से यात्री माधोसिंह आया करते थे। उनके अलावा मिर्जापुर से तांबे या पीतल के बर्तन भी आया करते थे। उनका माधोसिंह में यानांतरण होता था। उस रेल लाइन की अपनी संस्कृति थी, अपना अर्थशास्त्र।

बर्फी सोनकर और (सब्जी) मण्डी के बदलाव के भय


बर्फी सोनकर अपने अनुभव, नेटवर्क, सूचनाओं और इनट्यूशन की बदौलत इतना कमाते हैं, जितना कोई मध्य स्तर की कम्पनी का सीईओ कमाता होगा। उनका लड़का रंगीला, अभी सीखते हुये बतौर आढ़त एप्रेण्टिस, मजे से व्यवसाय करता है।

पुरा-वनस्पति शास्त्री डा. अनिल पोखरिया जी


डा. अनिल से बातचीत में ही पता चला कि अरहर की दाल गांगेय प्रदेश में पहले नहीं मिलती। ओडिसा से सम्भवत यहां आयी। इसी प्रकार कटहल दक्षिण भारत से उत्तर के गांगेय और सरयूपार इलाकों में आया।

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