पिछली बुधवासरीय अतिथि पोस्ट में श्री पंकज अवधिया ने भूमिगत जल और उसके प्रदूषण पर विस्तृत जानकारी दी थी। आज के उनके इस लेख में भी जल पर और कोणों से चर्चा है। विशेषत: उन्होने क्लोरीनेशन के विषय में आम अल्पज्ञता के बारे में प्रकाश डाला है। उनके पुराने लेख आप पंकज अवधिया के लेबलContinue reading “जल का क्लोरीनेशन और अन्य समस्याओं पर विचार”
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आलू और कोल्डस्टोरेज
तेलियरगंज, इलाहाबाद में एक कोल्ड स्टोरेज है। उसके बाहर लम्बी कतारें लग रही हैं आलू से लदे ट्रकों-ट्रैक्टरों की। धूप मे जाने कितनी देर वे इन्तजार करते होंगे। कभी कभी मुझे लगता है कि घण्टो नहीं, दिनों तक प्रतीक्षा करते हैं। आलू की क्वालिटी तो प्रतीक्षा करते करते ही स्टोरेज से पहले डाउन हो जातीContinue reading “आलू और कोल्डस्टोरेज”
विदर्भ: मैं विक्तोर फ्रेंकल पर लौटना चाहूंगा
आठ महीने से अधिक हुये मैने विक्तोर फ्रेंकल के बारे में पोस्ट लिखी थी: विक्तोर फ्रेंकल का आशावाद और जीवन के अर्थ की खोज अब जब विदर्भ की आत्महत्याओं नें मन व्यथित किया है, तब इस पोस्ट की पुन: याद आ रही है। विदर्भ की समस्या वैसी ही जटिल है जसे नात्सी कंसंट्रेशन कैम्प कीContinue reading “विदर्भ: मैं विक्तोर फ्रेंकल पर लौटना चाहूंगा”
