अलाव, जवाहिर और आठ बिगहा खेत


मैं कुहासे और काम के बोझ में सवेरे की सैर पर जाने वाला नहीं था, पर लगता है गंगामाई ने आमन्त्रण देते कहा कि तनी आवा, बहुत दिन्ना भये चक्कर नाहीं लगावत हय (जरा आओ, बहुत दिन से चक्कर नहीं लगा रहे हो)। और गया तो कुछ न कुछ बदलाव तो पाया ही। गंगाजी लगभग पचीसContinue reading “अलाव, जवाहिर और आठ बिगहा खेत”

जवाहिरलाल वापस आ गया है


जवाहिरलाल वापस आ गया है। दो महीना पहले उसे सांप ने काट खाया था। अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर उसके बन्धु गण आये और उसे मछलीशहर ले गये। अब वह ठीक है। कल सवेरे वह शिवकुटी के गंगाजी के घाट की सीढ़ियों के पास अपने नियमित स्थान पर बैठा पाया गया। इससे पहले किContinue reading “जवाहिरलाल वापस आ गया है”

जवाहिर लाल को सर्पदंश


आज बहुत दिनों बाद – लगभग दो-तीन हफ्ते बाद – गंगा तट पर सवेरे गया। ठण्डी हवा तेज थी और गंगाजल में लहरें भी किनारे से टकराती तेज आवाज कर रही थीं। नहाने वाले आठ दस लोग थे। नदी में पानी बढ़ा हुआ था – दूर दूसरे किनारे पर कई वृक्ष जलमग्न दीख रहे थे।Continue reading “जवाहिर लाल को सर्पदंश”

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