जवाहिरलाल का बोण्ड्री का ठेका


जवाहिरलाल कई दिन से शिवकुटी घाट पर नहीं था। पण्डाजी ने बताया कि झूंसी में बोण्ड्री (बाउण्ड्री) बनाने का ठेका ले लिया था उसने। उसका काम खतम कर दो-तीन दिन हुये वापस लौटे। आज (फरवरी 14’2012) को जवाहिरलाल अलाव जलाये बैठा था। साथ में एक और जीव। उसी ने बताया कि “कालियु जलाये रहे, परऊंContinue reading “जवाहिरलाल का बोण्ड्री का ठेका”

आठ बिगहा पर आगे चर्चा


यह एक रेवलेशन था कि जवाहिरलाल के पास आठ बिगहा खेत है; बहादुरपुर, मछलीशहर में। किन परिस्थितियों में वह गांव से निकला और यहां दिहाड़ी पर लेबर का काम करता है; वह समझने के लिये उससे और भी अन्तरंगता चाहिये। जो मेरे साथ अभी नहीं है। पर जवाहिर के आठ बिगहा जमीन के बारे मेंContinue reading “आठ बिगहा पर आगे चर्चा”

नदी के और मन के लैगून


लैगून (lagoon)  को क्या कहते हैं हिन्दी में? कामिल-बुल्के में शब्द है समुद्रताल। समुद्र के समीप वह  उथला जल जो सब ओर से धरती से घिरा हो – वह लैगून है। इसी तरह नदी/गंगा का पानी पीछे हटते समय जो उथले जल के द्वीप बना देता है उसे लैगून कहा जायेगा या नहीं? मैं बहुधाContinue reading “नदी के और मन के लैगून”

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