आपका मोबाइल, आपका ई–मेल, आपकी डाक, आपके सामने से गुजरने वाले ढ़ेर सारे विज्ञापन – सभी इंश्योरेंश पॉलिसी बेचने में जुटे हैं। आपकी बहुत सी ऊर्जा इन सब से निपटने में लगती है। आपके फोन पर जबरन चिपके उस इंश्योरेंस कम्पनी वाले लड़के/लड़की को स्नब करने के लिये आपको गुर्राना पड़ता है। उसके बाद कुछContinue reading “बेस्ट इंश्योरेंस पॉलिसी”
Category Archives: धर्म
नेचुरल जस्टिस – माई फुट!µ
मैं रोज सवेरे शाम दफ्तर आते जाते अनेक पशु-पक्षियों को देखता हूं। लोहे की जाली में या पगहे में बन्धे। उन सबका लोगों की मांग या इच्छा पर वध होना है। आज या कल। उन्होने जब जन्म लिया तो नेचुरल डेथ तक उनका जीने का अधिकार है – या नहीं? अगर है तो उनके साथContinue reading “नेचुरल जस्टिस – माई फुट!µ”
हैं कहीं बोधिसत्व!
काशी तो शाश्वत है। वह काशी का राजा नहीं रहा होगा। वरुणा के उस पार तब जंगल रहे होंगे। उसके आसपास ही छोटा-मोटा राजा रहा होगा वह। बहुत काम नहीं था उस राजा के पास। हर रोज सैनिकों के साथ आखेट को जाता था। जंगल में हिंसक पशु नहीं थे। सो हिरण बहुत थे। वहContinue reading “हैं कहीं बोधिसत्व!”
