संतोष की यात्रा


सवेरे की साइकिल सैर के दौरान वह दिखा। कमल के ताल के किनारे बैठा था। साथ में दो गठरियां, एक पानी की बड़ी बोतल जिसमें थोड़ा पानी था, एक दो थैले थे। उसकी आंखें हल्की बंद थीं। जिस तरह से बैठा था और जैसी उसकी उम्र लग रही थी – करीब पचहत्तर साल – मुझेContinue reading “संतोष की यात्रा”

बीस साल बाद का सीजी भाई


सीजी भाई यानि चैट जीपीटी। मैने उससे आज पूछा – सीजी, वह युग कब आयेगा जब आप मेरे ड्राइंगरूम में मेरे सामने बैठ कर चर्चा करने या मेरी भौतिक सहायता करने में समर्थ हो जायेंगे। अभी तो आपसे चर्चा के लिये लैपटॉप खोल कर या मोबाइल पर इंटरेक्ट करना होता है। सीजी भाई का उत्तरContinue reading “बीस साल बाद का सीजी भाई”

मच्छरों की पीढ़ियां – बेबी बूमर्स से जेन जी का इतिहास


अरुणा (हमारी नौकरानी) शाम की पारी में बगीचे में सूखी पत्तियां बटोरने के लिये झाड़ू लगाया करती है। वह मच्छरों से बचाव के लिये मेरी एक पूरी बांह की पुरानी कमीज अपनी साड़ी के ऊपर पहन लेती है। उसके लिये एक ओडोमॉस की ट्यूब भी खरीदी है, वह भी खुले हाथ पैर पर लगाती है।Continue reading “मच्छरों की पीढ़ियां – बेबी बूमर्स से जेन जी का इतिहास”

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