झुलाओ मेरी सजनी, श्याम पड़े पलना


अक्तूबर ३०’२०१२:  दो स्त्रियां यह गीत गाते हुये एक अंगोछे में कुछ (बाल कृष्ण का प्रतीक) झुला रही थीं गंगा किनारे। कोहरा बहुत था। इक्का दुक्का लोग थे स्नान करने वाले गंगा जी के शिवकुटी घाट पर। उनका यह झुलाना और गायन बहुत अच्छा लगा मुझे। पर यह समझ नहीं आया कि ऐसा कर क्योंContinue reading “झुलाओ मेरी सजनी, श्याम पड़े पलना”

उसमें जिन्दा है मछली अभी भी


नवम्बर २’२०१२ वे तीन थे। एक अधेड़। तहमद पहने और उसे पानी से बचाने के लिये आधा उलटे हुये। ऊपर पूरी बांह का स्वेटर पहने। एक जवान – कमीज-पतलून में। एक किशोर होता बच्चा – वह भी कमीज पतलून पहने था। दोनो ने पतलून पानी से बचने ऊपर चढ़ा रखी थी। उनके पास एक नावContinue reading “उसमें जिन्दा है मछली अभी भी”

गंगा किनारे चेल्हा के लिये मशक्कत


बारिश का मौसम बीतने के बाद गंगा सिकुड़ी हैं। उससे पानी उथला हो गया है गंगा किनारे। चेल्हा मछली इस समय किनारे मिलती है। मछेरे उसके लिये जाल डालते हैं, सवेरे सवेरे। मैं जब पंहुचा किनारे पर तो सवेरे के छ बज चुके थे। इस मौसम के हिसाब से कोहरा घना था। मछेरा जाल निकालContinue reading “गंगा किनारे चेल्हा के लिये मशक्कत”

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