बिसखोपड़ा


शिवकुटी जैसी गँहरी (गँवई + शहरी) बस्ती में घुस आया तो वह बिसखोपड़ा था। नहीं तो सुसंस्कृत विषखोपड़ा होता या फिर अपने किसी अंग्रेजी या बायोलॉजिकल नाम से जाना जाता। मेरी पत्नीजी वाशिंग मशीन से कपड़े धो रही थीं तो परनाले की पाइप से एक पूंछ सा कुछ हिलता देखा उन्होने। सोचा कि सांप आContinue reading “बिसखोपड़ा”

सरपत की बाड़


सर्दी एकबारगी कम हो कर पल्टा मार गयी। शुक्र-सनीचर को सब ओर बारिश हुई। कहीं कहीं ओले भी पड़े। ट्विटर पर रघुनाथ जी ट्वीट कर रहे थे कि दिल्ली में ओले भी पड़े। बनारस से अद्दू नाना ने फोन पर बताया कि देसी मटर पर पाला पड़ गया है। ओले पड़े थे, उसके बाद फसलContinue reading “सरपत की बाड़”

टेंगर


[टेंगर, और यह कि सोंइस (मीठे जल की डॉल्फिन) रोज दिखती है यहां।] एक नाव पर वे दो थे – बाद में पता चला नाम था लल्लन और राकेश। लल्लन के हाथ में पतवार थी और राकेश जाल डाल रहा था गंगा नदी में। हम – मैं और मेरी पत्नीजी – गंगा किनारे खड़े देखContinue reading “टेंगर”

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