ये हैं हमारे गंगा स्नान करने वाले “सभ्य” लोग


शिवकुटी के सवर्णघाट पर नित्य 200-300 लोग पंहुचते होंगे। नहाने वाले करीब 50-75 और शेष अपने घर का कचरा डालने वाले या मात्र गंगातट की रहचह लेने वाले। ये लोग अपेक्षकृत पढ़े लिखे तबके के हैं। श्रमिक वर्ग के नहीं हैं। निम्न मध्यम वर्ग़ से लेकर मध्य मध्यम वर्ग के होते हैं ये लोग। कुछContinue reading “ये हैं हमारे गंगा स्नान करने वाले “सभ्य” लोग”

चिलुआ


बारिश का समय गया। अंतिम बार बारिश हुये लगभग दो सप्ताह होने को आया। गंगामाई पीछे हटी हैं। इस बार पीछे हटते समय खालिस रेत नहीं, बहुत सी मिट्टी ला दी है उन्होने घाट पर। लगभग 300-400 कदम जमीन जो छोड़ी है उन्होने, उसमें मिट्टी की मात्रा अधिक होने के चलते काफी दलदल है। वहContinue reading “चिलुआ”

गंगा तीरे बयानी


चार दिन पहले जवाहिर लाल गंगाजी की धारा के पास रेती में बैठा दिखा था। सामान्यत वह सवेरे घण्टा भर पण्डाजी की चौकी के बगल में कछार को छूते तट के करार की जमीन पर बैठा मुखारी करता पाया जाता था। पण्डा जी ने बताया कि एक दो दिन पहले उसकी फलाने परसाद से कहाContinue reading “गंगा तीरे बयानी”

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