बारिश का मौसम बीतने के बाद गंगा सिकुड़ी हैं। उससे पानी उथला हो गया है गंगा किनारे। चेल्हा मछली इस समय किनारे मिलती है। मछेरे उसके लिये जाल डालते हैं, सवेरे सवेरे। मैं जब पंहुचा किनारे पर तो सवेरे के छ बज चुके थे। इस मौसम के हिसाब से कोहरा घना था। मछेरा जाल निकालContinue reading “गंगा किनारे चेल्हा के लिये मशक्कत”
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कल्लू की प्लानिंग
कछार में घूमते पीछे से नमस्कार की आवाज आयी तो देखा कल्लू था। अपने सफेद छोटी साइज वाले कुत्ते के साथ चला आ रहा था। वह शायद मुझे अपने परिवेश से बाहर का ऐसा व्यक्ति मानता है, जिसको अपनी गतिविधियां बेलाग तरीके से बता सकता है। आज भी वह इसी मूड में दिख रहा था।Continue reading “कल्लू की प्लानिंग”
आम्रपाली : एक बौना आम
मण्डुआडीह के स्टेशन मैनेजर हैं श्री सीपी सिंह। उन्हें कहीं से आम्रपाली संकर प्रजाति के आम के बिरवे मिले। उनमें से चार उन्होने मुझे भेजे। शायद मेरी पत्नीजी ने बहुत पहले उनसे अनुरोध कर रखा था इस विषय में। मुझे नहीं मालुम था कि आम्रपाली एक बौनी प्रजाति है आम की। अन्यथा आम तो ६०-१००Continue reading “आम्रपाली : एक बौना आम”
