निषादघाट पर वे चार बैठे थे। मैने पहचाना कि उनमें से आखिरी छोर पर अवधेश हैं। अवधेश से पूछा – डाल्फिन देखी है? सोंइस। उत्तर मिला – नाहीं, आज नाहीं देखानि (नहीं आज नहीं दिखी)। लेकिन दिखती है? हां कालि रही (हां, कल थी)। यह मेरे लिये सनसनी की बात थी। कन्फर्म करने के लियेContinue reading “सोंइस होने की गवाही”
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जवाहिरलाल बीमार है
जवाहिरलाल गंगदरबारी(बतर्ज रागदरबारी) चरित्र है। कछार में उन्मुक्त घूमता। सवेरे वहीं निपटान कर वैतरणी नाले के अनिर्मल जल से हस्तप्रक्षालन करता, उसके बाद एक मुखारी तोड़ पण्डाजी के बगल में देर तक मुंह में कूंचता और बीच बीच में बीड़ी सुलगा कर इण्टरवल लेता वह अपने तरह का अनूठा इन्सान है। कुत्तों और बकरियों काContinue reading “जवाहिरलाल बीमार है”
शिवकुटी घाट पर छठ
आज ब्लॉगरी के सेमीनार से लौटा तो पत्नीजी गंगा किनारे ले गयीं छठ का मनाया जाना देखने। और क्या मनमोहक दृष्य थे, यद्यपि पूजा समाप्त हो गयी थी और लोग लौटने लगे थे। चित्र देखिये: तट का विहंगम दृष्य: घाट पर कीर्तन करती स्त्रियां: घाट पर पूजा: सूप में पूजा सामग्री: लौटते लोग:
