(मनिहारी की दुकान में खरीददारी में जुटी महिलायें) बुरे फंसे हरतालिका तीज की पूर्व सन्ध्या खरीद में. मेरी पत्नी कल शाम को खरीददारी के लिये निकल रही थीं. मैं साथ में चला गया इस भाव से कि इस बहाने शाम की वॉक हो जायेगी. पर पैदल चलना हुआ सो हुआ, खरीददारी में चट गये पूरीContinue reading “हरतालिका तीज की पूर्व सन्ध्या की खरीद”
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ऐसी स्थिति में कैसे आ जाते हैं लोग?
एक अच्छी कद काठी का नौजवान सड़क के किनारे लेटा था. अर्ध जागृत. गौर-वर्ण. बलिष्ठ देह. शरीर पर कहीं मांस न कम न ज्यादा. चौड़ा ललाट. कुल मिला कर हमारी फिल्मों में या मॉडलिंग में लुभावने हीरो जैसे होते हैं, उनसे किसी भी प्रकार उन्नीस नहीं. पर मैले कुचैले वस्त्र. कहीं कहीं से फटे हुयेContinue reading “ऐसी स्थिति में कैसे आ जाते हैं लोग?”
वृद्धावस्था के कष्ट और वृन्दावन-वाराणसी की वृद्धायें
मेरे मित्र श्री रमेश कुमार (जिनके पिताजी पर मैने पोस्ट लिखी थी) परसों शाम मुझे एसएमएस करते हैं – एनडीटीवी इण्डिया पर वृद्धों के लिये कार्यक्रम देखने को कहते हैं. कार्यक्रम देखना कठिन काम है.पहले तो कई महीनों बाद टीवी देख रहा हूं तो “रिमोट” के ऑपरेशन में उलझता हूं. फिर वृद्धावस्था विषय ऐसा हैContinue reading “वृद्धावस्था के कष्ट और वृन्दावन-वाराणसी की वृद्धायें”
