तिलकवाड़ा में सवेरे – 21 मई की सुबह, प्रेमसागर रवि काका जी के साथ बैठे थे मारुति मंदिर परिसर में। रवि काका जी की उम्र कोई पचहत्तर साल होगी – ऐसा प्रेमसागर ने बताया। रवि काका सोनावणे जी भी पदयात्री हैं नर्मदा माई के। माई की पूरी परिक्रमा तीन बार कर चुके हैं। सौ-डेढ़ सौContinue reading “तिलकवाड़ा से झारिया”
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चांडोद से तिलकवाड़ा
चांडोद ओरसांग, सरस्वती (गुप्त) और नर्मदा का त्रिवेणी संगम है। उत्तर तट पर जो बीस बाइस प्रमुख नदियां नर्मदा में आ कर मिलती हैं, उनमें से ओरसांग भी एक है। ओरसांग मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले से अरावली की दक्षिणी पहाड़ियों से निकलती है और गुजरात में छोटा उदयपुर से होते हुये चांडोद में नर्मदा मेंContinue reading “चांडोद से तिलकवाड़ा”
नर्मदा पदयात्रा – सुरासामळ से चांडोद
सोलह मई को भरूच के नीलकंठ महादेव मंदिर से प्रेमसागर ने परिक्रमा पदयात्रा प्रारम्भ की थी। उन्नीस मई को चार दिन पूरे हो गये। लम्बी यात्रा में पहला कदम महत्वपूर्ण होता है। यह चार दिन की यात्रा पहला कदम ही मानी जाये। अगर यात्रा पटरी से उतरनी होती तो इस बीच उतर गई होती। अबContinue reading “नर्मदा पदयात्रा – सुरासामळ से चांडोद”
