मैने विचार किया कि कभी चिन्ना (दस साल की मेरी पोती) को क्रायोजेनिक रॉकेट के बारे में बताऊंगा तो गांज के रॉकेट की भी बात करूंगा। निश्चय ही उसकी बड़ी बड़ी आंखे और खुल जायेंगी। वह पूरे उत्साह से कहेगी – “बाबा […]
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लघुभ्रमणिका
आगे भगवानपुर की ओर कोहरे की एक पट्टी नजर आती है। मानो सलेटी रंग का कोई बहुत मोटा अजगर जमीन पर लेटा और धीरे धीरे रेंग रहा हो। उसके पीछे सूर्योदय हो चुका है। पर उनका ताप कोहरे के अजगर को खतम नहीं कर सका है।
ईंटवा का गंगा तट
लगता है ये मछलियां गंगा के जल में बह कर आगे नहीं निकल जातींं। यहीं रहती हैं। गंगा किनारे की मछलियां। मैं सोचता था कि जो जल में है सब बहता है। सब यात्रा पर है। पर वैसा नहीं है। कुछ जलचर भी एक ही जगह रहते हैं।
