राजन भाई की गेंहू थ्रेशाई


गांवदेहात डायरी एक्यूआई बताने वाले एप्प की बजाय हवा की सही गुणवत्ता बताने के तरीके गांव देहात में अलग हैं। बनारस जाने वाली पसीजर कितने बजे जाती है; वही तय करती है कि बगल के केवटान और पसियान में चूल्हे कब सुलगाये जायेंगे और कब हवा में धुआं भरेगा। पसीजर से कई मरसेधू काम परContinue reading “राजन भाई की गेंहू थ्रेशाई”

जातियों में बंटी औरतें


गांवदेहात डायरी यहां गांवदेहात में गांव कई हिस्सों में बंटा है—ब्राह्मण, केवट, पासी और चमरउट। इनके पुरुष अलग-अलग व्यवसाय में हैं और महिलाओं का जीवन भी अलग-अलग तरह से चलता दिखता है। मैं इन्हें हाशिये से देखता हूं; बहुत-सी बातें पत्नीजी से सुनकर समझता हूं। हर हिस्से में महिलाओं की स्वतंत्रता, उनके काम और घर-समाजContinue reading “जातियों में बंटी औरतें”

युद्ध से मुक्ति की जुगत


गांवदेहात डायरी तीन दिन से हमने गैस स्टोव का प्रयोग नहीं किया। हम लाई-चना या केले पर जिंदा नहीं रहे, न ही बाजार से पका हुआ भोजन खरीदा। घर में रोटी, पराठा, सब्जी, दाल, चावल—सब कुछ बना। स्वाद भी मिला और पौष्टिकता भी बनी रही। हमने न लकड़ी जलाई, न उपले खरीदे, न कोयले काContinue reading “युद्ध से मुक्ति की जुगत”

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