सगड़ी वाला बूढ़ा


इग्यारह बज रहे थे। कोहरे का पर्दा हल्के से ठेल कर कानी आंख से सूरज भगवान ताकने लगे थे। वह बूढ़ा मुझे मर्यादी वस्त्रालय के आगे अपनी सगड़ी (साइकिल ठेला) पर बैठा सुरती मलता दिखा। बात करने के मूड़ में मैने पूछा – आजकल तो बिजली का ठेला भी आने लगा है। वह लेने कीContinue reading “सगड़ी वाला बूढ़ा”

मुन्ना पांडे की प्रसन्नता और मेरा आईना


संभव है कि नागपुर पहुँचते-पहुँचते मैं यह तय कर पाऊँ कि कौन ज़्यादा संतुलित जीवन जी रहा है—
मुन्ना पांडे या मैं। मैं आईने में खुद को निहारता हूं। पर शायद मैं खुद को नहीं, मुन्ना पांडे सरीखे को देखना चाहता हूं।

धामिन (चूहे खाने वाले सांप) के अंडे


घर के कोने में धामिन के अंडे दिखे।

ग्यारह अंडों में से शायद केवल दो ही पूर्ण वयस्क धामिन बनेंगे। अगर उनकी औसत उम्र दस वर्ष मानी जाए, तो एक साँप अपने जीवन में करीब चार सौ चूहे खा लेगा। इस प्रकार, इन ग्यारह अंडों का समूह लगभग आठ सौ चूहों से फसल बचा सकता है। यह छोटी संख्या नहीं है — धामिन सचमुच खेती-किसानी का मौन प्रहरी है।
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धामिन प्रायः 7 से 10 फुट लम्बा, कलाई जितना मोटा और बहुत तेज़ गति से सरकने वाला साँप होता है।
वह सामने पड़ने पर गर्दन फैला कर ऐसा आकार बना लेता है मानो कोबरा हो, और यही उसकी रक्षा का तरीका भी है।
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पर डर या भ्रम में लोग उसे विषैला कोबरा समझ कर मार भी देते हैं।

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